गोवा में बीजेपी की राष्ट्रीय कार्यकारणी की बैठक में घमासान मचा हुआ है। कार्यकारिणी में मोदी समर्थकों का बोलबाला है, लेकिन कई सीनियर नेताओं के विरोध के कारण मोदी को लोकसभा चुनावों की कैंपेन कमिटी का प्रमुख बनाने में देरी हो रही है। भले ही पार्टी अधिकारिक रूप यह दावा कर रही है कि सीनियर नेता लालकृष्ण आडवाणी बीमारी के कारण गोवा नहीं आए, लेकिन सूत्रों की बात मानें तो इसके पीछे कुछ और ही 'खेल' चल रहा है। पार्टी पूरी तरह से 2 खेमों में बंट चुकी है। सूत्रों की बात पर भरोसा करें तो पार्टी प्रमुख राजनाथ सिंह लालकृष्ण आडवाणी की गैरमौजूदगी में ही नरेंद्र मोदी को कैंपेन कमिटी का प्रमुख बनाने का ऐलान रविवार को कर सकते हैं। ऐसा लग रहा है कि अब बीजेपी में आडवाणी का वक्त खत्म हो चुका है, पार्टी मोदी के नेतृत्व में अगली सियासी पारी खेलने की तैयारी कर रही है।
बीजेपी के वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक में शामिल होने के लिए गोवा नहीं पहुंचे। कल आडवाणी गोवा नहीं गए थे। आज आडवाणी के बिना ही कार्यकारिणी की बैठक शुरू हो गई। दिन भर बीजेपी के तमाम नेता आडवाणी को लेकर सफाई देते रहे, लेकिन समझने वाले समझ ही गए कि आडवाणी की गैरमौजूदगी आखिर किन वजहों से है।
बीजेपी के प्रवक्ता प्रकाश जावड़ेकर ने शनिवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस की और कहा कि आडवाणी जी सचमुच बीमार हैं। डॉक्टर ने उन्हें आराम करने की सलाह दी है। इसी वजह से वे अगले 3-4 दिन तक सिर्फ आराम करेंगे। जावड़ेकर ने कहा कि राजनाथ सिंह ने भी आडवाणी को तनाव न लेने की सलाह दी है। राजनाथ ने फोन पर आडवाणी को यह सलाह दी। जावड़ेकर ने बताया कि आडवाणी ने बीजेपी कार्यकर्ताओं को शुभकामनाएं दी हैं। जब प्रकाश जावड़ेकर से आडवाणी की बीमारी के बारे में पूछा गया तो उन्होंने कहा कि यह मौसम बदलने की वजह से है, कोई बड़ी बीमारी नहीं है। जावड़ेकर ने कहा कि आडवाणी उनके मार्गदर्शक रहे हैं और रहेंगे।
गोवा के मुख्यमंत्री मनोहर पर्रिकर ने शनिवार को नरेंद्र मोदी का खुलकर समर्थन करते हुए कहा कि गुजरात के मुख्यमंत्री को अगले लोकसभा चुनावों में बीजेपी का 'चेहरा' बनाया जाना चाहिए। इस तरह वह मतभेदों से जूझ रही पार्टी में मोदी का खुला समर्थन करने वाले पहले सीनियर नेता बन गए हैं। पर्रिकर ने 'प्रशासनिक क्षमताओं' और 'लोकप्रियता' के लिए मोदी की तारीफों के पुल बांधते हुए कहा कि गुजरात के मुख्यमंत्री को पार्टी के चेहरे के रूप में पेश करने से बीजेपी की चुनावी संभावनाओं को जबर्दस्त मजबूती मिलेगी।
उन्होंने कहा, 'मोदी को लोकसभा चुनावों से कम से कम छह महीने पहले यानी कि अगले साल मई के आसपास बीजेपी के चेहरे के तौर पर पेश किया जाना चाहिए, ताकि देश के उन लोगों के सामने सब कुछ 'स्पष्ट' हो सके जो अस्पष्टता पसंद नहीं करते।' मोदी के लिए पर्रिकर का खुला समर्थन बीजेपी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की 2 दिवसीय बैठक से इतर आया है। समझा जाता है कि बैठक में अगले साल लोकसभा चुनाव और इस साल के अंत में 5 राज्यों में होने वाले विधानसभा चुनावों को लेकर पार्टी के रोडमैप पर चर्चा किए जाने की उम्मीद है।
उत्तर प्रदेश में सहारनपुर जिले के देवबंद में संत स्वामी ब्रहमानंद सरस्वती और योग गुरु शांतनु जी महाराज ने आज प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार के रूप में गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी का समर्थन किया है और वरिष्ठ भाजपा नेता लाल कृष्ण आडवाणी को नसीहत दी है कि वे मोदी के रास्ते का रोड़ा न बनें। संत सरस्वती ने आज जारी एक प्रेस विज्ञप्ति में आडवाणी को राजनीति से संन्यास लेने की सलाह देते हुये कहा कि इस समय देश में नरेंद्र मोदी की हवा बह रही है। देश की जनता उन्हें केंद्रीय भूमिका में देखना चाहती है।
उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार देश में शांति व्यवस्था बनाए रखने में विफल रही है और विकास को गति नहीं दे पाई है जबकि गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में श्री मोदी लोगों की कसौटी पर खरा उतरे हैं। योग गुरु स्वामी शांतनु जी महाराज ने आडवाणी पर मोदी को प्रधानमंत्री बनने से रोकने के लिए ओछी चाल चलने का आरोप लगाया। उन्होंने वरिष्ठ भाजपा नेता कल्याण सिंह की भरपूर प्रशंसा करते हुए उन्हें आगामी चुनावों में उत्तर प्रदेश में पार्टी का तुरुप का पत्ता. बताया। साथ ही उन्होंने स्वामी रामदेव को संत समाज का सच्चा प्रतिनिधि बताया।
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