दिल्ली बीजेपी के लिए हर्षवर्धन हर बार बने
कर्णधार
पेशे
से डॉक्टर और राजनीति में अपनी साफ सुथरी छवि के लिए मशहूर दिल्ली बीजेपी के नेता
हर्षवर्धन पर बीजेपी एक बार फिर दांव खेलना चाहती है... दिल्ली विधानसभा चुनाव में
‘आप’ जैसी उभरती नई पार्टी और
सत्ताधारी कांग्रेस का सामना करना बीजेपी के लिए बड़ी चुनौती बनी हुई थी... लेकिन बीजेपी
ने दिल्ली में एक बार फिर विजय गोयल को हटाकर हर्षवर्धन पर दांव खेला और बीजेपी दिल्ली
विधानसभा चुनाव में पहली बड़ी पार्टी उभरकर निकली..लेकिन अपनी सरकार नहीं बना
सकी.. इस बार लोकसभा चुनाव में भी कुछ ऐसा ही हुआ.. लोकसभा चुनाव में बीजेपी ने जहां
एक ओर मोदी के नाम पर पूरे देश में पूर्ण बहुमत के साथ सत्ता हासिल की..तो वहीं
दूसरी ओर दिल्ली में सातो की सातो सीटों पर हर्षवर्धन के नेतृत्व में अपना कब्जा
जमाया... बीजेपी के लिए अब हर्षवर्धन मानो जैसे तुरुप का इक्का बन गए हों.. इसलिए बीजेपी
में हर्षवर्धन को कैबिनेट में दो मंत्रालय देने की मांग भी उठ गई है... क्यों कि
बीजेपी इस बार फिर से दिल्ली में आप और कांग्रेस को मात देकर एक तरफा कब्जा जमाना
चाहती है... और कब्जा जमाने के लिए बीजेपी दिल्ली में एक बार फिर हर्षवर्धन के
नेतृत्व में चुनाव लड़ने से गुरेज नहीं करेगी...
कौन हैं डॉक्टर
हर्षवर्धन
दिल्ली बीजेपी के लिए डॉ. हर्षवर्धन
का नाम किसी परिचय का मोहताज नहीं.. पूर्वी दिल्ली की कृष्णानगर
सीट से विधायक हर्षवर्धन इस सीट से लगातार चार बार जीत दर्ज कर चुके
हैं.. 1993 में
पहली बार जीतकर विधानसभा पहुंचे और उन्हें दिल्ली के स्वास्थ्य मंत्री की जिम्मेदारी मिली.. हर्षवर्धन
पेशे से डॉक्टर हैं.. उन्होंने
जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज से एमबीबीएस और फिर एमएस किया.. और ईएनटी में स्पेशलाइजेशन
किया.. उन्होंने दिल्ली में ईएनटी सर्जन के तौर पर प्रैक्टिस शुरू
की.. वे दिल्ली मेडिकल एसोसिएशन के सचिव से लेकर प्रेसीडेंट तक के पद पर रहे..
हर्षवर्धन के स्वास्थ्य मंत्री के तौर पर कार्यकाल को आज भी याद किया
जाता है... कम उम्र से राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़े हर्षवर्धन ने दिल्ली के चुनाव में बिलकुल सटीक ढंग से पार्टी का नेतृत्व किया.. हर्षवर्धन के करीबी भी उनके सरल व्यवहार और मिलनसार
व्यक्तित्व से खासे प्रभावित रहते हैं..
यही वजह है कि उन्हें समाज के अलग
अलग तबकों का समर्थन मिलता है.. उनके संघ से अच्छे रिश्ते हैं.. दिल्ली भाजपा के वरिष्ठ
नेताओं का मानना है कि हर्षवर्धन
को मुख्यमंत्री पद का उम्मीदवार बनाए जाने से पार्टी को खासा फायदा हुआ.. साल 2003 के आखिर में उन्हें दिल्ली भाजपा का अध्यक्ष बनाया गया.. पार्टी को फिर से संगठित करने का श्रेय उनको दिया जाता है...लेखक - अजीत पाण्डेय, राष्ट्रीय अध्यक्ष, पूर्वांचल विकास मोर्चा



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