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Wednesday, 7 August 2013

यह नामर्दों की है सरकार



कल देर रात हुए पाकिस्तानी हमले में पांच सैनिकों के शहीद हो जाने की खबर पर पूरे देश में आक्रोश है. प्रमुख विपक्षी दल भाजपा के नेता रविशंकर प्रसाद सिंह ने इस घटना पर दुख व्यक्त करते हुए कहा कि यह पाकिस्तान की हिमाकत है और हमें इसका जवाब देना होगा. रविशंकर ने कहा कि केंद्र सरकार की दुर्बलता के कारण पाकिस्तान ऐसे हमले कर रहा है. इससे सेना का मनोबल गिरेगा. उन्होंने कहा कि सरकार को कडे कदम उठाने होंगे.वहीं शिवसेना के प्रवक्ता संजय राउत ने कहा कि जब तक हम पाकिस्तानी सेना में घुसकर पांच के बदले पचास नहीं मारेंगे, तब तक वे ऐसी कार्रवाइयों को अंजाम देते रहेंगे. सरकार को आड़े हाथ लेते हुए संजय राउत ने कहा कि सरकार नामर्दों की है. सरकार के अंदर सब ऐसे ही लोग बैठे है.  वहीं कांग्रेस नेता राजीव शुक्ला ने कहा कि यह घटना दुखद है और सरकार आवश्यक कार्रवाई करेगी. जम्मू कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने भी हमले की निंदा की है.
सेना प्रमुख विक्रम सिंह ने आज पाकिस्तानी हमले में मारे गये पांच शहीद जवानों के शवों पर माल्यार्पण कर श्रद्धांजलि व्यक्त की।
रक्षा प्रवक्ता एसएन आचार्य ने बताया कि नयी दिल्ली से यहां पहुंचने के तुरंत बाद जनरल सिंह जम्मू में टेक्नीकल एयरपोर्ट पहुंच कर तिरंगे से लपेट कर ताबूत में रखे गये शवों पर माल्यार्पण किया।
उनके अलावा, नार्दन आर्मी थियेटर के वरिष्ठ सैन्य अधिकारी, जीओसी-इन-सी लेफ्टिनेंट जनरल संजीव चाचरा, जीओसी, 16 कॉेर लेफ्टिनेंट जनरल डीएस हुडा, जीओसी, टाइगर डिविजन, मेजर जनरल अश्वनी कुमार और एयर आॅफिसर कमांडिंग एयर कोमोडोर पी ई पटगिया ने भी शहीदों के शवों पर माल्यार्पण किया। माल्यार्पण के बाद, सेना प्रमुख और अन्य अधिकारी सैनिकों के सम्मान में कुछ देर तक मौन खड़े रहे। इस अवसर पर बिगुल बजा कर सेना की एक टुकड़ी ने सलामी दी। एक वरिष्ठ सैन्य अधिकारी ने बताया कि आज दोपहर लगभग तीन बज कर 45 मिनट पर शव जम्मू से नयी दिल्ली भेजे जायेंगे । बाद में इन शवों को दिल्ली से पटना और पुणे के लिए वायुसेना के विमानों से भेजा जाएगा। उन्होंने बताया कि चार शवों को पटना भेजा जाएगा और एक शव को पुणे भेजा जाएगा।

Monday, 5 August 2013

मानसून सत्र में पास नहीं होगा फूड सिक्योरिटी बिल!



खाद्य सुरक्षा अध्‍यादेश आज संसद में पेश कर दिया गया है. यह विधेयक  खाद्य मंत्री वी के थामस ने पेश किया. खाद्य सुरक्षा अध्यादेश पर समाजवादी पार्टी के  सुप्रीमो मुलायम सिंह ने कहा अगर सरकार किसानों को उनके उत्पाद का लाभ देना सुनिश्चित करे तो हम खाद्य सुरक्षा विधेयक का समर्थन करेंगे

हालांकि संसद के मॉनसून सत्र की पूर्व संध्या पर सपा नेता नरेश अग्रवाल ने स्पष्ट कर दिया कि मौजूदा स्वरुप में यह विधेयक उनकी पार्टी को स्वीकार्य नहीं है और उसमें कुछ संशोधनों की जरुरत है और अगर जरुरत पड़ी तो पार्टी उसके खिलाफ मतदान करेगी. उन्होंने कहा, अगर जरुरत पड़ी तो हम उसके खिलाफ मतदान करेंगे. सपा संप्रग सरकार को बाहर से समर्थन दे रही है. उसके लोकसभा में 22 सांसद हैं और विधेयक को पारित कराने के लिए उसका समर्थन महत्वपूर्ण है. इस विधेयक को संप्रग सरकार निर्णायक भूमिका निभाने वाला बता रही है.

अग्रवाल ने हालांकि इस बात से इंकार किया कि खाद्य सुरक्षा विधेयक पर उनकी पार्टी के रुख का उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा आईएएस अधिकारी दुर्गा शक्ति नागपाल का निलंबन करने के मुद्दे पर कांग्रेस अध्यक्ष द्वारा प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को भेजे गए पत्र से कोई लेना-देना है. उन्होंने गलत नीतियों पर चलने के लिए संप्रग सरकार पर निशाना साधा. उन्होंने कहा कि इस तरह के पत्र आम हैं और उनका कोई महत्व नहीं है.संसद के मानसून सत्र के दौरान कांग्रेस के गेम चेंजर प्लान फूड सिक्योरिटी बिल पर ही संकट के बादल मंडराने लगे हैं। समाजवादी पार्टी के सुर जहां समर्थन पर बदल गए हैं वहीं विपक्षी दल भी सरकार का खेल खराब करने पर आमादा हैं।

दुर्गा की शक्ति को लेकर सोनिया गांधी ने पीएम को खत क्या लिखा मॉनसून सत्र में सरकार के सारे समीकरण गड़बड़ाने लगे हैं। अभी तक कांग्रेस का साथ देने की बात कह रही समाजवादी पार्टी के सुर भी तल्ख हो गये। पार्टी ने सोनिया के पसंदीदा फूड सिक्योरिटी बिल को अटकाने की धमकी दे डाली।

शनिवार को ही पीएम ने विपक्ष समेत सभी दलों से फूड बिल पास कराने में मदद की अपील की थी लेकिन अब यूपीए का सहयोग कर रही समाजवादी पार्टी के पलटने से कांग्रेसी खेमा परेशान है। लेकिन सोनिया के खत से दुविधा में पड़े पार्टी नेता दुर्गा के मुद्दे को नजरअंदाज नहीं कर पा रहे। 

जाहिर है, अगर दुर्गा शक्ति पर सियासत यूं ही जारी रही, तो कोई ताज्जुब नहीं कि दुर्गा की ईमानदारी सोनिया के खाने की गारंटी के बिल की बलि ले ले। अगर ऐसा हुआ, तो दुर्गा शक्ति के मामले में दखल कांग्रेस के लिए ही गेम चेंजर साबित हो जायेगा।

बीजेपी सांसद को जहर देकर मारने की साजिश!



छत्तीसगढ़ के जांजगीर चम्पा जिले की भाजपा सांसद कमला पाटले को खाने में जहर देकर मारने की साजिश का सनसनीखेज मामला सामने आया है। जांजगीर चाम्पा के पुलिस अधीक्षक आरिफ शेख ने इस संदिग्ध मामले की पुष्टि करते बताया है कि एफआईआर दर्ज कर जांच की जा रही है। जांजगीर पुलिस ने अज्ञात आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है।
पुलिस सूत्रों के अनुसार सांसद पाटले के रसोईये रूपेंद्र कुमार को फोन कर कुछ लोगों ने नहर किनारे बुलाया। उसे एक कैप्सूल दिखाते हुए उन्होंने कहा कि सांसद को खाने में मिलाकर देना है। उसे रुपयों का बंडल दिखाने के साथ काम नहीं करने पर जान से मारने की धमकी दी गई। किसी तरह घबराकर वह वहां से भागने मे कामयाब रहा।
पुलिस को दिए बयान के अनुसार रूपेंद्र वहां से सांसद निवास आने की बजाय रेल लाइन के किनारे बीस पच्चीस किलोमीटर दूर भाग निकला। एक भाजपा कार्यकर्ता ने उसे बदहवास हालत में देखा तो सांसद को सूचना दी। सांसद के सहयोगी उसे वहां से घर लाए जहां उसने घटनाक्रम की जानकारी दी। सांसद की सूचना पर पुलिस अधिकारी कल शाम उनके निवास पहुंचे। इस संदिग्ध मामले में आज एफआईआर दर्ज की गई। सांसद का कहना है कि उनकी किसी से दुश्मनी नहीं है।

शॉटगन का होगा नया ठौर!



यदि यह कहा जाए कि राजनीति में भी कुछ भी स्थायी नहीं होता है, तो कोई अतिश्योक्ति नहीं होगी। कहा जा रहा है कि भाजपा सांसद और अभिनेता  ‘शॉटगन’ यानी शत्रुघ्न सिन्हा  जल्द ही जेडीयू में शामिल हो सकते हैं। गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी के चुनाव प्रचार समिति के अध्यक्ष बनने के बाद से ही शॉटगन ने अपने तेवर तल्ख कर रहे हैं। पहले मोदी की खिलाफत और उसके बाद नीतीश कुमार की सोहबत में आने के बाद सियासी गलियारों में चर्चा जोरों पर है कि शत्रुघ्न सिन्हा जल्द ही जेडीयू खेमा में शामिल हो सकते हैं।
सूत्रों का कहना है कि जेडीयू की ओर से उन्हें पार्टी में शामिल होने का आमंत्रण मिला है। भाजपा से संबंध टूटने के बाद नीतीश ने उन्हें अपनी सेना में शामिल होने का न्योता दिया है। गौरतलब है कि इसके पहले भी शत्रुघ्न सिन्हा ने गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ बगावत का झंडा बुलंद किया था। उन्होंने कहा था कि मोदी को पीएम पद तक पहुंचाने के लिए लालकृष्ण आडवाणी और सुषमा स्वराज जैसे सीनियर नेताओं को किनारे लगाया जा रहा है। सिन्हा ने चेतावनी देते हुए कहा था कि कहीं कोई अपना ही पार्टी के खिलाफ गोल न कर दे। इस बयान के अगले ही दिन वह बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से मिलकर सियासी अटकलों का बाजार गरम कर दिया था।
एक ओर भाजपा जहां बिहारी बाबू के बयान से सकते में है, तो वहीं सूबे की सियासत में इसके कई मायने ढूंढे जा रहे हैं। बाकौल शत्रुघ्न सिन्हा, ‘नीतीश पीएम मेटेरिल हैं। इस पद के लिए उनकी क्षमता पर कोइ सवाल नहीं उठा सकता। वे अपने निजी संबंधों के आधार पर राजग व जदयू के बीच सेतु बनाने की कोशिश करेंगे। हमलोग सत्रह साल तक साथ रहे। अगर आज हम साथ नहीं, तो इसका अर्थ नहीं हो सकता कि हम कल भी एक नहीं होंगे। मेरे बिहार के मुख्यमंत्री के साथ भाई जैसे संबंध हैं, वह मुझे काफी सम्मान देते हैं।’
जाहिर है बिहारी बाबू ने जाने-अनजाने न सिर्फ भाजपा से प्रधानमंत्री पद के दावेदार नरेंद्र मोदी को खारिज कर दिया, वरन नीतीश कुमार को इस पद का योग्य व्यक्ति बता भाजपा की पसंद पर भी सवाल खड़ा कर दिया है। हालांकि कुछ लोग इसे बिहारी बाबू का पार्टी में हो रही उपेक्षा से जोड़ कर देखते हैं। ऐसे लोगों का मत है कि भाजपा नेतृत्व की ओर से हो रहे अनदेखी की वजह पटना साहिब के सांसद ने इस तरह का बयान दिया। यही कारण है कि शत्रुघ्न सिन्हा अपने मूल बयान से दो दिन बाद ही पलट गए। बावजूद इस प्रकरण को कुछ लोग नरेंद्र ्र मोदी व शत्रुघ्न सिन्हा की निजी दुश्मनी को वजह मानते हैं। कुछ ऐसे भी हैं, जो इसे बिहारी बाबू का प्रदेश भाजपा को तोड़ने की मंशा व पटना साहिब से भाजपा से संसदीय टिकट कटता देख जदयू से जुगाड़ को जोड़ते हैं।
दरअसल, शत्रुघ्न सिन्हा की भाजपा में अब वह हैसियत नहीं है, जिसके बूते पूर्व में वे अगराते रहे हैं। पार्टी में सिने अभिनेता सिन्हा की भूमिका एक स्टार प्रचारक व भीड़-जुटाउ नेता की रही है। नरेन्द्र मोदी ने प्रचार समीति के अध्यक्ष बनने के बाद से पार्टी के स्टार प्रचारक व भीड जुटाने का जिम्मा अपने पाले में रखा है। नरेन्द्र मोदी से शॉटगन के असमान्य रिश्ते की कहानी भी जगजाहिर है, जिसका आगाज अमिताभ बच्चन को गुजरात के ब्रांड एम्बेस्डर बनाए जाने से है। बिहारी बाबू गुजरात के ब्रांड एंबेस्डर के तौर पर खुद को स्वभाविक दावेवार मानते थे। वे भाजपा में थे और बॉलीवुड के बेहतरीन अभिनेताओं में शुमार भी। इनके प्रयास से ही गुजरात में फिल्म सीटी का विकास हुआ। बावजूद इसके, नरेंद्र मोदी ने अतिाभ बच्चन को गुजरात का ब्रांड एम्बेस्डर बना दिया। गौर करने योग्य यह भी है कि अमिताभ बच्चन का जुड़ाव पहले कांग्रेस और बाद में समाजवादी पार्टी से रहा। उनकी अर्द्धांगिनी जया बच्चन आज भी सपा से राज्यसभा में सांसद है।
एक जमाना था कि बिहार में भाजपा के लिए शत्रुघ्न सिन्हा से बड़ा कोई राजनेता नहीं था। स्टार प्रचारकों की सूची में काफी इज्जत के साथ उनका नाम लिया जाता था। जिस भी मंच पर वे चले जाते थे, नेता गदगद हो जाते थे। एनडीए के शासनकाल में जब बिहार  विधानसभा चुनाव में एनडीए सबसे बड़ा गठबंधन बनकर उभरा तो सरकार बनाने का उसे न्योता मिला। उस समय जदयू से ज्यादा सीटें भाजपा के पास थी। भाजपा की तरफ से शत्रुघ्न सिन्हा से भी कहा गया कि वह मुख्यमंत्री बने। लेकिन शत्रुध्न सिन्हा जानते थे कि सरकार अपना बहुमत नहीं साबित कर पाएंगी इस लिए नाक कटवाने के लिए सीएम क्यों बना जाए?
इन तमाम घटनाओं-परिघटनाओं के बीच लाख टके सवाल यह कि बिहारी बाबू को ‘नमो’ के खिलाफत की ताकत मिल कहां से रही है? तो इसका टका सा जवाब है बिहार भाजपा में नरेंन्द्र मोदी के खिलाफ परवान चढता बगावत का सुर। नीतीश कुमार को पीएम मेटेरियल बताने वालों की बढ़ती तादाद और नरेंद्र मोदी के खिलाफ पार्टी में ही उठते बागी सुर यह बताने के लिए काफी है कि भाजपा में सब कुछ ठीक नहीं चल रहा, जिसका फायदा शत्रुघ्न सिन्हा जैसे नेता को सीधे तौर पर पहुंचा है। न चाहते हुए भी ऐसे बागी नेता अपने को शत्रु के साथ जोड़कर नमो विरोध को व्यापक रंग देने की कोशिश कर रहे हैं।

Saturday, 3 August 2013

मोदी हैं ईमानदार, पारदर्शी और उदार



 गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात के कुछ महीने बाद अमेरिका के एक रिपब्लिकन सांसद ने उनके ईमानदार, पारदर्शी और उदार शासन की सराहना की और कहा कि यह भारतीय राज्य में भारी निवेश करने के लिए अमेरिकी कंपनियों को आकर्षित कर रहा है. कांग्रेस सदस्य आरोन शॉक ने पीओरिया मैग्जीन के अगस्त संस्करण में कहा, फोर्ड और टाटा मोटर्स जो गुजरात में नए कारखानों में अरबों रुपये का निवेश कर रही हैं, जैसी कंपनियांे के नेतृत्व के साथ बैठक के दौरान मैं यह जानकर प्रभावित हुआ कि इन नीतियों को सद् इच्छा और अमेरिकी कंपनियों के सहयोग से लागू किया जा रहा है.

शॉक ने लिखा, इन कंपनियों ने विशेष तौर पर भारत के इस क्षेत्र को निवेश के लिए इसलिए चुना क्योंकि सरकार ईमानदार, पारदर्शी और उदार है. जब गुजरात सरकार ने सामान बाजार तक पहुंचाने में उनकी मदद के लिए सड़क निर्माण का वायदा किया तो उसने उसे पूरा किया. अहमदाबाद में मार्च में मोदी से मिलने वाले शॉक ने हालांकि अपने लेख में उनके नाम का उल्लेख नहीं किया. उन्होंने लिखा, टेक्सास और कैलिफोर्निया से अधिक आबादी वाले गुजरात ने पिछले कई सालों से 10 प्रतिशत वार्षिक आर्थिक वृद्धि दर्ज की है. कांग्रेस सदस्य ने लिखा, गुजरात में अधिकारियों के साथ बैठक में मैंने पाया कि उनका ध्यान क्षेत्र में व्याप्त भ्रष्टाचार के उन्मूलन पर है जो पूरे देश में फैला है. हाउस वेज एंड मीन्स कमेटी तथा व्यापार से संबंधित इसकी उप समिति के सदस्य शॉक ने कहा, पारदर्शिता बढ़ाने, मामले में राजनीति नहीं करने, नौकरशाही से संबंधित बाधाओं को दूर कर कंपनियों के लिए अच्छा माहौल तैयार करने की उनकी नीतियों के बारे में सुनकर अच्छा लगा. उन्होंने कहा कि गुजरात में सफलता की कहानियां पाई जा सकती हैं, लेकिन दुर्भाग्य से भारत के शेष हिस्सों ने इसका अनुसरण नहीं किया है.

सहयोग करे विपक्षः मनमोहन



पिछले दो-तीन सत्रों में काफी समय बर्बाद होने पर अफसोस व्यक्त करते हुए प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने आज विपक्षी दलों से कहा कि वे अत्यंत महत्वपूर्ण खाद्य सुरक्षा विधेयक सहित विधायी कायो’ में सहयोग करे. विपक्ष द्वारा उठाये जाने वाले सभी मुद्दों पर चर्चा का वायदा करते हुए प्रधानमंत्री ने उम्मीद जतायी कि सोमवार से शुरु हो रहा संसद का मानसून सत्र रचनात्मक और उत्पादक होगा. सदन की कार्यवाही सुचारु रुप से सुनिश्चित करने के उद्देश्य से लोकसभा अध्यक्ष मीरा कुमार द्वारा बुलायी गयी सर्वदलीय बैठक के बाद सिंह ने यहां संवाददाताओं से कहा कि उन्हें उम्मीद है कि यह संसद का रचनात्मक एवं उत्पादक सत्र होगा.

पिछले दो से तीन सत्र में काफी समय बर्बाद हुआ और संसद के समक्ष काफी विधायी कार्य लंबित है. उन्होंने कहा कि हम हर उस मुद्दे पर चर्चा को तैयार हैं, जो विपक्ष को आंदोलित कर सकता है लेकिन हम विपक्ष से सम्मानपूर्वक कहेंगे कि वह आवश्यक विधायी कार्य संपन्न कराने में सरकार का सहयोग करे. संसद के समक्ष विचाराधीन पांच से छह अध्यादेशों में से सिंह ने खाद्य सुरक्षा अध्यादेश को सबसे अधिक महत्वपूर्ण बताया.सिंह ने कहा कि खाद्य सुरक्षा विधेयक सबसे महत्वपूर्ण है और उन्हें उम्मीद है कि संसद पूरी गंभीरता से उसे पारित कर देगी.

Thursday, 1 August 2013

आखिर महंगाई से तिल-तिलकर जनता को मारने का सिलसिला कब तक चलता रहेगा?

अंतरराष्ट्रीय बाजार में दाम बढ़ने की वजह से पेट्रोल के दाम आज 70 पैसे लीटर बढ़ा दिये गये. पिछले दो महीने में पांचवीं बार पेट्रोल के दाम बढ़े हैं. डीजल के दाम में भी 50 पैसे लीटर की वृद्धि की कर दी गई.

महंगाई पर देश की जनता बेकार अपनी ऊर्जा खर्च कर रही है। बहुत चिल्ल-पौं मचाने के बाद सरकार न तो संसद के अंदर सुन रही है और न ही संसद के बाहर। वाकई लोकतंत्र के मायने बदल गए। कई दफा तो ऐसा लगता है कि लोकतंत्र है भी या नहीं। देश की जनता महंगाई की मार से बेहाल है। किचन में गृहिणियां रुआंसा हो रही हैं। लेकिन सरकार थेथरलॉजी देकर कीमतें बढ़ाने की दलील दे रही है। देश की 90 फीसदी जनता इन दिनों यही कह रही है कि सरकार, तुझ पर ऐतबार न रहा।

इसमें केंद्र और राज्य सरकार दोनों ही दोषी हैं। लेकिन बढ़ती महंगाई के लिए सबसे ज्यादा केंद्र सरकार ही जिम्मेदार है। यूपीए सरकार के गठन के बाद न जाने कितनी बार पेट्रोलियम पदार्थों के दाम बढ़े हैं। आखिर सारी महंगाई के कारण यूपीए सरकार को ही क्यों झेलनी पड़ रही है, यह भी शोध का विषय है। संसद में महंगाई विरोधी विपक्ष के हंगामे के बाद भी सरकार नहीं चेती।

आखिर महंगाई से तिल-तिलकर जनता को मारने का सिलसिला कब तक चलता रहेगा?