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Thursday, 1 August 2013

आखिर महंगाई से तिल-तिलकर जनता को मारने का सिलसिला कब तक चलता रहेगा?

अंतरराष्ट्रीय बाजार में दाम बढ़ने की वजह से पेट्रोल के दाम आज 70 पैसे लीटर बढ़ा दिये गये. पिछले दो महीने में पांचवीं बार पेट्रोल के दाम बढ़े हैं. डीजल के दाम में भी 50 पैसे लीटर की वृद्धि की कर दी गई.

महंगाई पर देश की जनता बेकार अपनी ऊर्जा खर्च कर रही है। बहुत चिल्ल-पौं मचाने के बाद सरकार न तो संसद के अंदर सुन रही है और न ही संसद के बाहर। वाकई लोकतंत्र के मायने बदल गए। कई दफा तो ऐसा लगता है कि लोकतंत्र है भी या नहीं। देश की जनता महंगाई की मार से बेहाल है। किचन में गृहिणियां रुआंसा हो रही हैं। लेकिन सरकार थेथरलॉजी देकर कीमतें बढ़ाने की दलील दे रही है। देश की 90 फीसदी जनता इन दिनों यही कह रही है कि सरकार, तुझ पर ऐतबार न रहा।

इसमें केंद्र और राज्य सरकार दोनों ही दोषी हैं। लेकिन बढ़ती महंगाई के लिए सबसे ज्यादा केंद्र सरकार ही जिम्मेदार है। यूपीए सरकार के गठन के बाद न जाने कितनी बार पेट्रोलियम पदार्थों के दाम बढ़े हैं। आखिर सारी महंगाई के कारण यूपीए सरकार को ही क्यों झेलनी पड़ रही है, यह भी शोध का विषय है। संसद में महंगाई विरोधी विपक्ष के हंगामे के बाद भी सरकार नहीं चेती।

आखिर महंगाई से तिल-तिलकर जनता को मारने का सिलसिला कब तक चलता रहेगा?

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