केंद्रीय खाद्य मंत्री की ओर से प्याज की बढ़ी कीमतें कम करने में असमर्थता जाहिर करने वाले दिए बयान को हास्यपद करार देते पूर्वांचल विकास मोर्चा के अध्यक्ष अजीत कुमार पांडेय ने कहा कि केंद्रीय खाद्य मंत्री को अपने पद से तुरंत इस्तीफा दे देना चाहिए, क्योंकि आम लोगों की रोटी में से प्याज को गायब किए जाने के कारण उनको अपने पद पर बने रहने का कोई अधिकार नहीं है। उन्होंने कहा कि विभागीय मंत्री तो नाम के हैं, सारा किया-धराया प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी का है।
अजीत कुमार पांडेय कहते हैं कि केंद्र की कांग्रेस सरकार के शासन में महंगाई सभी सीमाएं पार कर गई है। देश के आम लोगों के हालात तो इस कदर बन गए हैं कि आम आदमी दो वक्त की रोजी-रोटी से असमर्थ हो गया है। केंद्र सरकार ने प्याज की कीमतों पर नकेल कसने के लिए अभी तक कोई ठोस कदम ही नहीं उठाया, जिस कारण प्याज की कीमतों में बेतहाशा बढ़ोत्तरी हो रही है। देश के लोग इस महंगाई के लिए सीधे तौर पर जिम्मेदार कांग्रेस पार्टी को ठहरा रहे हैं। वे देश में से कांग्रेस पार्टी का मुकम्मल सफाया करने के लिए पूरी तरह से उतावले हैं। दीवाली के दिनों में प्याज आम लोगों से छीनकर केंद्र सरकार ने बहुत बड़ा धक्का किया है, जिसका जवाब देश के लोग सरकार से शासन छीनकर देंगे।
पूर्वांचल विकास मोर्चा के अध्यक्ष केंद्र की कांग्रेस सरकार की गलत नीतियों के कारण देश में बेरोजगारी, भुखमरी, गरीबी, भ्रष्टाचार, अनपढ़ता व महंगाई का बोलबाला है। प्याज की कीमतें आसमान को छू रही हैं। उन्होंने कहा कि कांग्रेस सरकार अब कुछ ही पलों की मेहमान है। आज की तारीख में देश में आम जनता दो चीजों को लेकर बहुत परेशान है-एक महंगाई से और दूसरे करप्शन से। करप्शन पर तो लोग जागरूक दिख रहे हैं, आवाज उठा रहे हैं। पर महंगाई को लेकर जनता अपना दुखड़ा किसके सामने रोए? स्थिति यह है कि रोजाना कमाने-खाने वाले लोगों के पास अगले दिन खाने को कुछ नहीं होता। उधर सरकार और उसके मंत्री कोई आश्वासन देने के बजाय कहते हैं कि महंगाई पर उनका कोई वश नहीं है। वह तो तेज विकास की देन है। यानी उसे तो लोगों को झेलना ही पड़ेगा। पर क्या सच में इस महंगाई में सरकार का कोई योगदान नहीं है? असल में यह महंगाई सरकारी नीतियों की ही वजह से पैदा हुई है। इसके पीछे मैं जिन दो मुख्य वजहों को जिम्मेदार मानता हूं, उनमें सीधे-सीधे इस सरकार का ही हाथ है। पहली वजह यह है कि पिछले कुछ वर्षों में सरकारी घाटा बेतहाशा बढ़ा है और दूसरी यह कि अच्छा उत्पादन होने के बावजूद खाद्यान्न की कीमतों पर नियंत्रण नहीं रखा गया है।

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