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Friday, 17 August 2018

अटल जी को श्रद्धांजलि अर्पित करता हूं, उन्हें नमन करता हूं: अजीत

पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के निधन पर पूरे देश में शोक का माहौल है। सचमुच यह एक बड़ा नुकसान है हमारे देश के लिए... क्योंकि हम अटल जी को अपनी आखिरी सलामी दे रहे हैं। वह मेरे दिल के बहुत करीब थे और उनकी विरासत को हमेशा याद किया जाएगा। मैं अजीत पाण्डेय दिल से शोक व्यक्त करता हूं।

अटल जी के इस दुनिया से विदा हो जाने से हर कोई दुखी है। इसका असर देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर पड़ा है। उन्होंने कहा कि मैं नि:शब्द हूं, शून्य में हूं, लेकिन भावनाओं का ज्वार उमड़ रहा है। हम सभी के श्रद्धेय अटल जी हमारे बीच नहीं रहे। अपने जीवन का प्रत्येक पल उन्होंने राष्ट्र को समर्पित कर दिया था। उनका जाना, एक युग का अंत है। इसके अलावा उन्होंने ब्लॉग लिख कर अपना दुख व्यक्त किया।

मेरे अटल जी
अटल जी अब नहीं रहे। मन नहीं मानता। अटल जी, मेरी आंखों के सामने हैं, स्थिर हैं। जो हाथ मेरी पीठ पर धौल जमाते थे, जो स्नेह से, मुस्कराते हुए मुझे अंकवार में भर लेते थे, वे स्थिर हैं। अटल जी की ये स्थिरता मुझे झकझोर रही है, अस्थिर कर रही है। एक जलन सी है आंखों में, कुछ कहना है, बहुत कुछ कहना है लेकिन कह नहीं पा रहा। मैं खुद को बार-बार यकीन दिला रहा हूं कि अटल जी अब नहीं हैं, लेकिन ये विचार आते ही खुद को इस विचार से दूर कर रहा हूं। क्या अटल जी वाकई नहीं हैं? नहीं। मैं उनकी आवाज अपने भीतर गूंजते हुए महसूस कर रहा हूं, कैसे कह दूं, कैसे मान लूं, वे अब नहीं हैं। 
वे पंचतत्व हैं। वे आकाश, पृथ्वी, जल, अग्नि, वायु, सबमें व्याप्त हैं, वे अटल हैं, वे अब भी हैं। जब उनसे पहली बार मिला था, उसकी स्मृति ऐसी है जैसे कल की ही बात हो। इतने बड़े नेता, इतने बड़े विद्वान। लगता था जैसे शीशे के उस पार की दुनिया से निकलकर कोई सामने आ गया है। जिसका इतना नाम सुना था, जिसको इतना पढ़ा था, जिससे बिना मिले, इतना कुछ सीखा था, वो मेरे सामने था। जब पहली बार उनके मुंह से मेरा नाम निकला तो लगा, पाने के लिए बस इतना ही बहुत है। बहुत दिनों तक मेरा नाम लेती हुई उनकी वह आवाज मेरे कानों से टकराती रही। मैं कैसे मान लूं कि वह आवाज अब चली गई है।
कभी सोचा नहीं था, कि अटल जी के बारे में ऐसा लिखने के लिए कलम उठानी पड़ेगी। देश और दुनिया अटल जी को एक स्टेट्समैन, धारा प्रवाह वक्ता, संवेदनशील कवि, विचारवान लेखक, धारदार पत्रकार और विजनरी जननेता के तौर पर जानती है। लेकिन मेरे लिए उनका स्थान इससे भी ऊपर का था। सिर्फ इसलिए नहीं कि मुझे उनके साथ बरसों तक काम करने का अवसर मिला, बल्कि मेरे जीवन, मेरी सोच, मेरे आदर्शों-मूल्यों पर जो छाप उन्होंने छोड़ी, जो विश्वास उन्होंने मुझ पर किया, उसने मुझे गढ़ा है, हर स्थिति में अटल रहना सिखाया है। हमारे देश में अनेक ऋषि, मुनि, संत आत्माओं ने जन्म लिया है। देश की आज़ादी से लेकर आज तक की विकास यात्रा के लिए भी असं य लोगों ने अपना जीवन समर्पित किया है। लेकिन स्वतंत्रता के बाद लोकतंत्र की रक्षा और 21वीं सदी के सशक्त, सुरक्षित भारत के लिए अटल जी ने जो किया, वह अभूतपूर्व है। उनके लिए राष्ट्र सर्वोपरि था- बाकी सब का कोई महत्व नहीं। इंडिया फस्र्ट - भारत प्रथम, ये मंत्र वाक्य उनका जीवन ध्येय था। पोखरण देश के लिए जरूरी था तो चिंता नहीं की प्रतिबंधों और आलोचनाओं की, क्योंकि देश प्रथम था। सुपर कंप्यूटर नहीं मिले, क्रायोजेनिक इंजन नहीं मिले तो परवाह नहीं, हम खुद बनाएंगे, हम खुद अपने दम पर अपनी प्रतिभा और वैज्ञानिक कुशलता के बल पर असंभव दिखने वाले कार्य संभव कर दिखाएंगे। और ऐसा किया भी।दुनिया को चकित किया। सिर्फ एक ताकत उनके भीतर काम करती थी- देश प्रथम की जिद।   

काल के कपाल पर लिखने और मिटाने की ताकत, हिम्मत और चुनौतियों के बादलों में विजय का सूरज उगाने का चमत्कार उनके सीने में था तो इसलिए क्योंकि वह सीना देश प्रथम के लिए धड़कता था। इसलिए हार और जीत उनके मन पर असर नहीं करती थी। सरकार बनी तो भी, सरकार एक वोट से गिरा दी गयी तो भी, उनके स्वरों में पराजय को भी विजय के ऐसे गगन भेदी विश्वास में बदलने की ताकत थी कि जीतने वाला ही हार मान बैठे। अटल जी कभी लीक पर नहीं चले। उन्होंने सामाजिक और राजनीतिक जीवन में नए रास्ते बनाए और तय किए। “आंधियों में भी दीये जलाने” की क्षमता उनमें थी। पूरी बेबाकी से वे जो कुछ भी बोलते थे, सीधा जनमानस के हृदय में उतर जाता था। अपनी बात को कैसे रखना है, कितना कहना है और कितना अनकहा छोड़ देना है, इसमें उन्हें महारत हासिल थी। राष्ट्र की जो उन्होंने सेवा की, विश्व में मां भारती के मान सम्मान को उन्होंने जो बुलंदी दी, इसके लिए उन्हें अनेक सम्मान भी मिले। देशवासियों ने उन्हें भारत रत्न देकर अपना मान भी बढ़ाया। लेकिन वे किसी भी विशेषण, किसी भी सम्मान से ऊपर थे।
जीवन कैसे जीया जाए, राष्ट्र के काम कैसे आया जाए, यह उन्होंने अपने जीवन से दूसरों को सिखाया। वे कहते थे, “हम केवल अपने लिए ना जीएं, औरों के लिए भी जीएं...हम राष्ट्र के लिए अधिकाधिक त्याग करें। अगर भारत की दशा दयनीय है तो दुनिया में हमारा सम्मान नहीं हो सकता। किंतु यदि हम सभी दृष्टियों से सुसंपन्न हैं तो दुनिया हमारा सम्मान करेगी” देश के गरीब, वंचित, शोषित के जीवन स्तर को ऊपर उठाने के लिए वे जीवनभर प्रयास करते रहे। वेकहते थे “गरीबी, दरिद्रता गरिमा का विषय नहीं है, बल्कि यह विवशता है, मजबूरी हैऔर विवशता का नाम संतोष नहीं हो सकता”। करोड़ों देशवासियों को इस विवशता से बाहर निकालने के लिए उन्होंने हर संभव प्रयास किए। गरीब को अधिकार दिलाने के लिए देश में आधार जैसी व्यवस्था, प्रक्रियाओं का ज्यादा से ज्यादा सरलीकरण, हर गांव तक सड़क, स्वर्णिम चतुर्भुज, देश में विश्व स्तरीय इंफ्रास्ट्रक्चर, राष्ट्र निर्माण के उनके संकल्पों से जुड़ा था।
आज भारत जिस टेक्नोलॉजी के शिखर पर खड़ा है उसकी आधारशिला अटल जी ने ही रखी थी। वे अपने समय से बहुत दूर तक देख सकते थे - स्वप्न दृष्टा थे लेकिन कर्म वीर भी थे।कवि हृदय, भावुक मन के थे तो पराक्रमी सैनिक मन वाले भी थे। उन्होंने विदेश की यात्राएं कीं। जहाँ-जहाँ भी गए, स्थाई मित्र बनाये और भारत के हितों की स्थाई आधारशिला रखते गए। वे भारत की विजय और विकास के स्वर थे। अटल जी का प्रखर राष्ट्रवाद और राष्ट्र के लिए समर्पण करोड़ों देशवासियों को हमेशा से प्रेरित करता रहा है। राष्ट्रवाद उनके लिए सिर्फ एक नारा नहीं था बल्कि जीवन शैली थी। वे देश को सिर्फ एक भूखंड, ज़मीन का टुकड़ा भर नहीं मानते थे, बल्कि एक जीवंत, संवेदनशील इकाई के रूप में देखते थे। “भारत जमीन का टुकड़ा नहीं, जीता जागता राष्ट्रपुरुष है।”यह सिर्फ भाव नहीं, बल्कि उनका संकल्प था, जिसके लिए उन्होंने अपना जीवन न्योछावर कर दिया। दशकों का सार्वजनिक जीवन उन्होंने अपनी इसी सोच को जीने में, धरातल पर उतारने में लगा दिया। आपातकाल ने हमारे लोकतंत्र पर जो दाग लगाया था उसको मिटाने के लिए अटल जी के प्रयास को देश हमेशा याद रखेगा।
अपने पुरुषार्थ को, अपनी कर्तव्यनिष्ठा को राष्ट्र के लिए समर्पित करना उनके व्यक्तित्व की महानता को प्रतिबिंबित करता है। यही सवा सौ करोड़ देशवासियों के लिए उनका सबसे बड़ा और प्रखर संदेश है। देश के साधनों, संसाधनों पर पूरा भरोसा करते हुए, हमें अब अटल जी के सपनों को पूरा करना है, उनके सपनों का भारत बनाना है। नए भारत का यही संकल्प, यही भावलिए मैं अपनी तरफ से और सवा सौ करोड़ देशवासियों की तरफ से अटल जी को श्रद्धांजलि अर्पित करता हूं, उन्हें नमन करता हूं।

Thursday, 1 February 2018

#Budget2018 से देश में और बढ़ेगी महंगाई



पूर्वांचल विकास मोर्चा के राष्टीय अध्यक्ष, अजीत कुमार पाण्डेय ने आम बजट को सरकार का मध्यम वर्ग के हितों पर कुठाराघात बताया है।


उन्होंने कहा कि इस बजट से देश में महंगाई बढ़ेगी। कृषि कल्याण सेस से सभी सेवाएं महंगी होने के साथ ही इन्फ्रा सेस और क्लीन एनर्जी सेस के कारण महंगाई आसमान छुएगी।

मौजूदा बजट से सबसे ज्यादा चिंता पूवार्चल के लोगों को हैं, जिंन्होंने मोदी जी को इतने बड़े बहुमत से जीत दिलवार्इ थी, लेकिन मोदी जी ने पूवार्चल को लोगों को कुछ नहं दिया।

बजट 2018 - 19 देश के लिए निराशा जनक रहा जो मध्यम वर्गीय एवं बेरोजगार युवां जिस उम्मीद से मोदी सरकार को 2014 में प्रचंड बहुमत से जिताया था 2018 - 19 के बजट बेरोजगारों, किसानो एवं मध्यम वर्गीय परिवारों की अनदेखी की गयी और इस बजट में कोई स्पष्ट रूप से साफ़ नहीं किया गया यह बजट किस प्रकार का है यह एक चुनावी जुमला देश के साथ धोखा हुआ

जिस उम्मीद से जनता ने  मोदी सरकार को पूर्ण बहुमत 2014 में उसमे चुनावी बर्ष में भी इन्होने और इनकी सरकार ने मध्यम वर्गीय, बेरोजगारों, युवाओं को निराशा ही हाथ लगी |
बजट 2018 - 19 देश के लिए निराशा जनक रहा जो मध्यम वर्गीय एवं बेरोजगार युवां जिस उम्मीद से मोदी सरकार को 2014 में प्रचंड बहुमत से जिताया था 2018 - 19 के बजट बेरोजगारों, किसानो एवं मध्यम वर्गीय परिवारों की अनदेखी की गयी और इस बजट में कोई स्पष्ट रूप से साफ़ नहीं किया गया यह बजट किस प्रकार का है यह एक चुनावी जुमला देश के साथ धोखा हुआ जिस उम्मीद से जनता ने  मोदी सरकार को पूर्ण बहुमत 2014 में उसमे चुनावी बर्ष में भी इन्होने और इनकी सरकार ने मध्यम वर्गीय, बेरोजगारों, युवाओं को निराशा ही हाथ लगी |

Saturday, 30 December 2017

नए साल की ढेरों शुभकामनाएं

न्यू ईयर बस कुछ ही वक्त में आने वाला है...... इस मौके पर हम अपने सभी शुभचिंतकों को शुभकामनाएं देते हुए अप सब के उज्जवल भविष्य़ की कामना करता हूं।

जैसे जैसे नया साल खिलता जाए, आशा है आपकी सारी इच्छाएं पूरी होती जाए। नए साल की ढेरों शुभकामनाएं!!


Saturday, 16 September 2017

PM नरेंद्र मोदी को जन्मदिन की शुभकामनाएं

ये वो शख्स है, जिसका आज महिमा मंडल देश ही नहीं दुनिया कर रही है। इनके व्यक्तित्व का ही प्रताप था कि जब इन्होंने एक कदम बढ़ाया तो आम और खास हरेक वर्ग इसने कंधे से कंधा मिलाकर खड़ा हो गया। वैसे तो आप समझ ही गए होंगे कि हम बात राजनीति की उस कद्दावर शख्सियत और देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की कर रहे हैं। आज इनका 67वां जन्मदिन है। देशभर में हो रही तैयारियों को देखकर ये जन्मदिवस से ज्यादा कोई त्यौहार ही प्रतीत हो रहा है। माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी को जन्मदिन की हार्दिक शुभकामनाएं

Monday, 14 August 2017

समस्त देश वासियों को स्वतंत्रता दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं जय हिन्द जय भारत

इसके गली और कूचे पल-पल भूले न भूलें; 
रंग यहाँ के हैं दो-चार, भारत भूमि है महान, 
माटी की सोंधी खुशबू लिए तितलियाँ घूमे चारों ओर,
 इसकी भीनी खूशबू फैलायें चारो ओर भारत भूमि है महान, इसकी मिट्टी मेरा मान।  
स्वतंत्रता दिवस की शुभ कामनायें!

Saturday, 4 February 2017

गरीब और माध्यमवर्गीय लोगों के लिए बेहतरीन बजट

पूर्वांचल विकास मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अजीत कुमार पाण्डेय ने आम बजट को ऐतिहासिक बताया और गरीब और माध्यमवर्गीय लोगों के लिए बेहतरीन बजट कहा। साथ ही केंद्र सरकार देश निर्माण में है जुटी हुयी है।

आज देश के आम बजट और रेल बजट को लेकर अजीत कुमार पाण्डेय ने कहा की केंद्र सरकार ने अगले पांच वर्षों में किसानों की आमदनी दोगुनी करने का लक्ष्य निर्धारित किया है। लोकसभा में वित्त मंत्री अरुण जेटली द्वारा पेश किये गये बजट में जहां एक ओर बजट में सबसे से ज्यादा बल किसान, गांव और गरीब पर दिया गया है, वहीं दूसरी ओर आम आदमी को सरकार ने इनकम टैक्स में बड़ी राहत दी और तीन लाख की इनकम को टैक्स फ्री कर दिया।

इसके अलावा केंद्र सरकार ने अगले पांच वर्षों में किसानों की आमदनी दोगुनी करने का लक्ष्य निर्धारित किया है, जो स्वागतयोग है। फसल बीमा योजना के लिए 9 हजार करोड़ रुपये आवंटित किये गये हैं। फसल बीमा 30 से बढ़ाकर 40 प्रतिशत कर दिया गया है। किसानों को कर्ज देने के लिए 10 लाख करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। डेयरी, स्वच्छ भारत अभियान से लेकर रोजगार बढ़ाने के लिए भी सरकार ने विभिन्न आयामों की घोषणा बजट में की है।

असंगठित क्षेत्र को भी संगठित क्षेत्र के दायरे में लाने की कोशिश की जा रही है। सरकार ने चुनावी खर्चों अंकुश लगाने और पार्टियों को मिलने वाले चंदा में पारदर्शिता बढ़ाने की दिशा में काम करने की प्रतिबद्धता दिखायी है। रक्षा बजट में काफी इजाफा किया गया है।

उन्होंने कहा कि रेल बजट में देश के विकास और आम आदमी की समृद्धि का हर संभव प्रयास किया है। यूपीए सरकार ने मनरेगा शुरू तो किया, लेकिन इसकी हालत खराब थी। लेकिन पीएम मोदी के सबका साथ – सबका विकास मिशन की दृढ़ प्रतिज्ञा ने कांग्रेस की नाकामी के प्रतीक बन चुकी मनरेगा से लोगों को रोजगार से जोड़ने का ऐतिहासिक काम किया है।

इतना ही नहीं, बजट में महिलाओं और बच्चों के कल्याण के लिए 1.84 करोड़ रूपए का प्रवाधान किया है, जो महिला सशक्तिकरण को और मजूबत करेगा। वित्त मंत्री जी ने बजट में सबों का ख्याल रखते हुए एक विकासोन्मुखी बजट देश को दिया है, जिसमें प्रधानमंत्री जी के देश को आगे बढ़ाने संकल्प है। इसके लिए हम प्रधानमंत्री जी और वित्त मंत्री जी को बधाई देते हैं।