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Tuesday, 16 September 2014

HAPPY BIRTHDAY NARENDRA MODI JI

आज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का जन्‍मदिन है। इस दिन को लेकर उत्‍साह का माहौल है। सबसे पहले पूर्वांचल विकास मोर्चा की तरफ से मैं मोदी जी को हृदिक बधाई देता हूं।

कहते हैं कि राजनीति में सबको सब-कुछ नहीं मिलता है, लेकिन भारतीय राजनीति में नरेंद्र मोदी ऐसे इकलौते राजनेता हैं जिन्होंने जब जो चाहा मिला, भले ही उसे पाने के लिए उन्हें बहुतेरे चुनौतियों का सामना करना पड़ा। अब प्रधानमंत्री के रूप में भी नरेंद्र मोदी के समक्ष बहुतेरे चुनौतियां आएंगी। लेकिन मोदी को करीब से जानने वाले कहते हैं कि मोदी देश के प्रधानमंत्री के रास्ते में आने वाली तमाम चुनौतियों का सामना करेंगे।
.नरेंद्र दामोदर दास मोदी ने जब अक्तूबर 2001 में मुख्यमंत्री के रूप में पहली बार गुजरात की सत्ता संभाली थी तब किसी ने, शायद खुद मोदी ने भी नहीं सोचा होगा कि एक दिन उन्हें प्रधानमंत्री बनकर भारत सरकार का कार्यभार संभालना पड़ेगा। निश्चित रूप से गुजरात की सत्ता ने ही मोदी को वो आधार दिया जिसके बूते उन्होंने प्रधानमंत्री के पद को पाने तक का सफर तय किया।

दिसंबर 2012 में गुजरात में नरेंद्र मोदी ने जीत की हैट्रिक लगाई थी। यह जीत नरेंद्र मोदी को देश का प्रधानमंत्री बनाने की जीत थी। पिछले डेढ़ दशक से लगातार गुजरात में भाजपा की सरकार है और खास बात यह है कि इन वर्षों में गुजरात ने आर्थिक और सामाजिक दोनों ही मोर्चे पर भारी तरक्की की है।

गुजरात की सफलताएं इतनी प्रभावशाली हैं कि देश क्या दुनिया की निगाहें गुजरात पर आकर ठहर जाती हैं।
निश्चित रूप से नरेंद्र मोदी एक ईमानदार राजनेता हैं। नैतिक जिम्मेदारी के साथ जीते हैं। उनकी प्रशासनिक क्षमता संदेह से परे है। जब वो गुजरात में थे तो विकास के लिए उनकी गिनती देश के काबिल मुख्यमंत्रियों में होती थी। मोदी के नाम पर भाजपा के कार्यकर्ता जोश से भर जाते हैं और सबसे बड़ी बात यह कि राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ और भाजपा जिस विचारधारा से ऊर्जा पाती है, मोदी उसके सबसे बड़े प्रतीक पुरुष हैं। मोदी ने इस विचारधारा को नया आयाम दिया है। उन्होंने भाजपा के `हिंदुत्व` को `विकास` से जोड़कर एक नया मॉडल पेश करने की कोशिश की जिसमें वह बेहद सफल रहे।

दरअसल जिस सोमनाथ से लालकृष्ण आडवाणी ने 1989 में राम मंदिर के लिए रथयात्रा शुरू की थी, वहीं से आशीर्वाद लेकर नरेंद्र मोदी ने भी औपचारिक रूप से गुजरात में अपना चुनावी अभियान छह करोड़ गुजरातियों के विकास के नारे के साथ शुरू किया था। यह पहला मौका था जब हिंदुत्व की जमीन पर खड़े नरेंद्र मोदी का छह करोड़ गुजरातियों के विकास का नारा प्रभावी दिखा।


सद्भावना उपवास के बाद मोदी ने गुजरात में किसी मुस्लिम को भाजपा का टिकट नहीं दिया, लेकिन विकास में बराबर की भागीदारी के नाम पर उन्हें भी अपने अभियान में शामिल करने की कोशिश की। इसके अलावा मोदी ने महिलाओं और युवाओं पर सबसे ज्यादा फोकस किया। गुजरात ने अपने पिछले रिकार्ड को तोड़ते हुए 2012 में हुए विधानसभा चुनाव में मतदान प्रतिशत का नया रिकार्ड बनाया। साल 1995 में विधानसभा चुनावों में रिकार्ड 64.70 फीसदी मतदान हुआ था। तब केशुभाई पटेल भाजपा के मुख्यमंत्री बने थे। 2012 के चुनावों ने
पिछले रिकार्ड को ध्वस्त करते हुए 71.30 फीसदी का नया रिकार्ड कायम किया है। मोदी ने सत्ता की हैट्रिक बनाई।

गोधरा कांड के बाद राज्य भर में भड़के दंगों के बाद साल 2002 के विधानसभा चुनावों में 61.55 फीसदी मतदान हुआ था और भाजपा सत्ता में आई थी। साल 2007 के विधानसभा चुनावों में हालांकि 59.77 फीसदी मतदान दर्ज किया गया था और तब भी भाजपा को सत्ता मिली थी। उस समय भाजपा को कुल 182 में से 117 सीटें मिली थी। कहने का मतलब यह कि मतदान प्रतिशत बढ़ने का तो गुजरात में भाजपा को फायदा होता ही है साथ ही एंटी इनकम्बेंसी फैक्टर के पंख भी इस प्रदेश में आकर कट जाते हैं। नरेंद्र मोदी ने मतदान के अंतिम चरण में मतदान करने से पहले कहा भी था कि गुजरात में प्रो-इनकम्बेंसी फैक्टर काम करता है। गुजरात में भाजपा की भव्य विजय होगी। निश्चित रूप से यह विकास में समाहित हिंदुत्व का एजेंडा ही है जो नरेंद्र मोदी की साख को लगातार बढ़ा रहा है।

दरअसल मोदी हिंदुत्व के जिस एजेंडे को लेकर चल रहे हैं वह वास्तविक हिंदुत्व की परिभाषा से ओतप्रोत है। मोदी के हिंदुत्व एजेंडा को आप सांप्रदायिकता के चश्मे से नहीं देख सकते हैं। नरेंद्र मोदी दरअसल वास्तविक राष्ट्रवाद के आधार पर शासन चलाते हैं और यह सत्य नियम है कि वास्तविक राष्ट्रवाद की बुनियाद पर काम किया जाए तो हिंदुत्व उस राष्ट्र का भविष्य बदल देता है। सोमनाथ मंदिर के सामने ठेला लगाने वाले मुसलमान भाई को इस बात से कोई मतलब नहीं कि प्रदेश में कौन जीत रहा है और कौन हार रहा है। वह मोदी राज में काफी सुरक्षित महसूस करते रहे हैं। असुरक्षा का भाव होने का सवाल अगर उनसे पूछेंगे तो उनका कहना है कि साहब! यहां मंदिर में सब हिंदू ही तो आते हैं। आज तक तो ऐसा कोई भाव नहीं आया।

गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में नरेंद्र मोदी देश के ऐसे इकलौते राजनेता रहे जो जिंदगी अपनी शर्तों पर जीते हैं और इसी दर्शन के साथ वह तीसरी बार सत्ता में आए। वर्ष 2002 में गुजरात में गोधरा की आग फैली थी तो पूरी दुनिया में गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी को अछूत मान लिया गया था। देश के तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने भी उन्हें `राजधर्म` का पालन करने की नसीहत दे डाली थी। ब्रिटेन ने 2002 में द्विपक्षीय सम्बंधों पर रोक लगा दी थी और मार्च-2005 में अमरीका ने मोदी को वीजा देने से इनकार कर दिया था। तब मोदी ने कसम खाई थी कि वह जीते जी अमेरिका की धरती पर कदम नहीं रखेंगे। और फिर मोदी ने गुजरात के परिदृश्य को ऐसे बदला कि गुजरात बना विकास मॉडल और नरेंद्र मोदी बने विकास पुरूष।

नरेंद्र मोदी ने जब अक्तूबर 2001 में मुख्यमंत्री के रूप में पहली बार कार्यभार संभाला था तब गुजरात 26 जनवरी, 2001 को आए विनाशकारी भूकंप की विभीषिका तले दबा हुआ था। तब लगता था मानो गुजरात फिर कभी उठ नहीं पाएगा। लेकिन पुनर्वास और पुनर्निमाण के तेज प्रयासों और पुन: उठ खड़े होने के लोगों के अदम्य साहस और जज्बे से गुजरात विकास के मार्ग पर अग्रसर हो गया। उस दौर में गुजरात के पुनर्वास कार्य को रोल मॉडल के तौर पर स्वीकार किया गया। अपने डेढ़ दशक से अधिक के शासनकाल में मोदी के विकासवादी सोच के कुछ अहम फैसलों ने गुजरात कि किस्मत ही बदल दी।

नरेंद्र मोदी प्रधानमंत्री बनने से पहले चुनावी अभियान के दौरान अपने भाषणों में अक्सर कहते थे कि कांग्रेस ने देश का भरोसा तोड़ा है। यह `भरोसा` शब्द भी एक चुनौती है नरेंद्र मोदी के लिए। देश की जनता ने आपको प्रचंड बहुमत से जिताकर आपके ऊपर भरोसा किया है।

आप आएंगे तो भ्रष्टाचार मिट जाएगा, महंगाई खात्म हो जाएगी, बेटियां असुरक्षित नहीं रहेंगी, सर्व धर्म सम्भाव की अस्मिता को ठोस नहीं पहुंचेगी, युवा बेरोजगार नहीं रहेंगे, देश में नक्सली हमला नहीं होगा, सबको बिजली और पीने के पानी का हक आदि-आदि। इन अहम् समस्याओं को लेकर एक ठोस एजेंडा देश के सामने रखना होगा और सिर्फ रखने से नहीं होगा, बल्कि देश की जनता को यह समझ में आना चाहिए कि हां, इस एजेंडे से वाकई उसका, उसके परिवार, समाज और अंतत: देश का भला होगा। तो गुजरात के मुख्यमंत्री से केंद्र सरकार में प्रधानमंत्री बनने के बाद नरेंद्र मोदी के लिए `जन भरोसा` को बरकरार रखना होगा।

एक बार फिर मोदी जी जन्मदिन की ढेर सारी बधाइयां

Thursday, 14 August 2014

पूर्वांचल विकास मोर्चा की तरफ से स्वतंत्रता दिवस की हार्दिक बधाई

पूर्वांचल विकास मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अजीत कुमार पाण्डेय ने स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर सभी नागरिकों को हार्दिक बधाई और शुभकामनाएं दी हैं। अपने संदेश में उन्होंने कहा कि इस महत्वपूर्ण अवसर पर हम उन बहादुर स्वतंत्रता सेनानियों को सलाम करते हैं जिनके साहस और बलिदान ने हमें दमनकारी औपनिवेशिक शासन से मुक्त कराया।

एक आधुनिक, धर्मनिरपेक्ष और लोकतांत्रिक राज्य बनाने में उनकी नि: स्वार्थ सेवाओं के बलिदान के लिए हम अपने नए लोकतंत्र के निर्माताओं को श्रद्धांजलि अर्पित करते हैं।

आइए, इस महत्वपूर्ण दिन को मनाने के साथ ही हम सभी एकजुट होकर और शांति, प्रगति और समृद्धि के रास्ते पर देश को आगे ले जाने के लिए सामूहिक रूप से काम करें"।

Monday, 28 July 2014

प्रधानमंत्री से फिर पूर्वांचल बनाने की मांग उठाई

आंध्र प्रदेश का विभाजन कर तेलंगाना राज्य बनाने की मांग पूरी होने के बाद पृथक पूर्वांचल की मांग भी जोर पकड़ने लगी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मिलकर पूर्वांचल विकास मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अजीत कुमार पाण्डेय ने पूर्वी उत्तर प्रदेश की सात करोड़ जनता के लिए अलग पूर्वाचल राज्य की मांग उठाई है।

पाण्डेय ने कहा, नेपाल से सटे होने के नाते के राष्ट्रीय सुरक्षा के लिहाज से इसकी संवेदनशीलता और प्रदेश के अन्य क्षेत्रों की तुलना में विकास के हर पैमाने पर पिछड़ेपन के मद्देनजर इस क्षेत्र को अलग राज्य का दर्जा मिले है। लंबे समय से क्षेत्र की जनता की इस मांग के पीछे की भावना का केंद्र सम्मान करे।
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पाण्डेय का तर्क था कि आबादी के लिहाज से देश के सघनतम आबाद ये क्षेत्र आजादी के बाद से ही घोर उपेक्षित है। इतनी बड़ी आबादी के लिए एक अदद केंद्रीय विश्वविद्यालय, केंद्रीय चिकित्सा, प्रोद्यौगिकी और प्रबंधन संस्थान का न होना इसका सबूत है। उद्योगों के लिहाज से भी यह क्षेत्र शून्य है। सार्वजनिक क्षेत्र की एक मात्र इकाई खाद कारखाने को बंद हुए दो दशक से अधिक हो गए। इसके बाद से पूरे क्षेत्र में सार्वजनिक या निजी क्षेत्र की एक भी बड़ी इकाई नहीं लगी। कभी गन्ना यहां की नकदी फसल थी और चीनी उद्योग पहचान, पर सरकारी उपेक्षा के नाते मिलें एक-एक कर बंद होती गई।

सीमावर्ती क्षेत्र होने के नाते यह इलाका राष्ट्रीय सुरक्षा के लिहाज से भी बेहद संवेदनशील है। ऐसे में जिस तरह उत्तराखंड, झारखंड, छत्तीसगढ़ राज्य का गठन हुआ और जिस तरह हाल में केंद्रीय कैबिनेट ने तेलंगाना के गठन की सहमति दी उसी तरह अलग पूर्वाचल राज्य के गठन की भी सहमति दे।

रस्तावित पूर्वांचल राज्य में सोनपुर और इलाहाबाद मंडल से लेकर बस्ती मंडल तक कुल 27 जिले, 149 विधानसभा सीटें और 29 लोकसभा की सीटें होंगी। इसकी राजधानी वाराणसी होगी। पूर्वांचल की आठ करोड़ की आबादी में 20 लाख से अधिक शिक्षित बेरोजगार हैं।

Saturday, 12 July 2014

बेहतर आर्थिक प्रबंधन का उदाहरण है यह बजट

पूर्वांचल विकास मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अजीत कुमार पाण्डेय ने बजट को बेहतर आर्थिक प्रबंधन का उदाहरण बताया है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी महँगाई कम करने के प्रयास कर रहे हैं। यह बजट उसी दिशा में एक अच्छा और सार्थक कदम है।

पाण्डेय ने ने कहा कि वर्तमान परिस्थिति में यह अद्भुत बजट है इसमें कोई नया कर नहीं लगाया गया है। बल्कि करों के बोझ को कम किया गया है। कृषि उपकरण जैसी कई जनोपयोगी वस्तुओं पर से कर कम किया गया है। इससे यह वस्तुएँ सस्ती होंगी।

बजट में कृषि, सिंचाई, अधोसंरचना विकास, ग्रामीण विकास, विद्युत, पेयजल आदि सभी क्षेत्रों के लिये पर्याप्त आवंटन किया गया है। नर्मदा-क्षिप्रा लिंक परियोजना लागू करने के बाद अब नर्मदा-गंभीर परियोजना के लिये इस बजट में प्रावधान किया गया है।

बजट में शिक्षा, स्वास्थ्य, महिला सशक्तिकरण को ध्यान में रखते हुए समुचित व्यवस्था की गई है। इसमें निवेशकों को आकर्षित करने तथा गरीबों को रोजगार देने के कार्यक्रमों को शामिल किया गया है। अत्यंत आवश्यक वस्तुओं पर से करों को कम कर राहत देने का काम किया गया है। यह बजट समाज के हर वर्ग की बेहतरी का प्रयास है।

Wednesday, 9 July 2014

अमित शाह बने बीजेपी के शहंशाह

राजधानी दिल्ली के 11 अशोका रोड स्थित बीजेपी मुख्यालय में अमित शाह को भारतीय जनता पार्टी का नया अध्यक्ष चुना गया. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शाह को मिठाई खिलाकर बधाई दी. 2014 के लोकसभा चुनाव में यूपी प्रभारी रहे अमित शाह को अध्यक्ष पद मिलना उनकी सफलता की कहानी कह रहा है. आइए नजर डालते हैं मुंबई में 22 अक्‍टूबर 1994 को जन्‍मे अमित अनिलचंद्र शाह के जीवन से जुड़े उस हर पहलू पर जो आपके लिए जानना जरूरी है.

रईस परिवार से ताल्‍लुक रखते हैं शाह
1.
मोदी के ठीक उलट अमित शाह गुजरात के एक रईस परिवार से ताल्लुक रखते थे.
2.
मनसा में प्लास्टिक के पाइप का पारिवारिक बिजनेस संभालते थे.
3. मेहसाणा में शुरुआती पढ़ाई के बाद बॉयोकेमिस्ट्री की पढ़ाई के लिए अहमदाबाद आए.
4.
अमित शाह ने बॉयोकेमिस्ट्री में बीएससी की, इसके बाद पिता का बिजनेस संभालने में जुट गए.
5. बचपन से ही शाह का संबंध आरएसएस के साथ रहा, कॉलेज के दिनों में वह आरएसएस के स्वयंसेवक बने.
6. 1982 में नरेंद्र मोदी से उनकी पहली मुलाकात हुई.
7. 1983 में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद से जुड़े और इस तरह उनका राजनीतिक करियर शुरू हुआ.
8. मोदी से एक साल पहले उन्होंने 1986 में बीजेपी ज्वाइन किया.
9. 1987 में अमित शाह भारतीय जनता युवा मोर्चा के सदस्य बने.
10. 1999 में अहमदाबाद डिस्ट्रिक्ट कोऑपरेटिव बैंक (एडीसीबी) के प्रेसिडेंट चुने गए.
11. 1997 में मोदी ने सरखेज के उपचुनाव में अमित शाह को उतारने की सलाह दी.
12. फरवरी 1997 में उपचुनाव जीतकर शाह विधायक बने.
13. 1998 के चुनाव में उन्होंने चुनाव जीतकर अपनी सीट बरकरार रखी.
14. 1997 से 2012 तक वे सरखेज से विधायक रहे.
15. 2009 में गुजरात क्रिकेट एसोसिएशन के वाइस प्रेसिडेंट बने.
16. 2013 में नरनपुरा से विधायक चुने गए.
17. 2014 में मोदी के पद छोड़ने के बाद GCA के प्रेसिडेंट बने.
18. 2003 से 2010 तक गुजरात सरकार की कैबिनेट में गृहमंत्रालय का जिम्मा संभाला.
19. शाह को पहला बड़ा राजनीतिक मौका मिला 1991 में, जब आडवाणी के लिए गांधीनगर संसदीय क्षेत्र में उन्होंने चुनाव प्रचार का जिम्मा संभाला.
20. इसी तरह का मौका 1996 में भी अमित शाह के पास आया. जब अटल बिहारी वाजपेयी ने गुजरात से चुनाव लड़ना तय किया. मोदी के कहने पर उस चुनाव की पूरी जिम्मेदारी फिर से अमित शाह को ही सौंपी गई. उस समय वाजपेयी पूरे देश में पार्टी का प्रचार कर रहे थे. उन्होंने अपने क्षेत्र में न के बराबर समय दिया. पूरा दारोमदार अमित शाह ने अपने कंधे पर उठाया.
21. 2002 में नरेंद्र मोदी की सरकार बनी में सबसे कम उम्र के अमित शाह को गृह (राज्य) मंत्री बनाया गया.
22. अभी तक अमित शाह ने कुल 42 छोटे-बड़े चुनाव लड़े लेकिन उनमें से एक में उन्होंने हार का सामना नहीं किया.
23. सोहराबुद्दीन शेख की फर्जी मुठभेड़ के मामले में अमित शाह को 2010 में गिरफ्तारी का सामना करना पड़ा. शाह पर आरोपों का सबसे बड़ा हमला खुद उनके बेहद खास रहे गुजरात पुलिस के निलंबित अधिकारी डीजी बंजारा ने किया.
24. 2014 लोकसभा चुनाव में यूपी में बीजेपी प्रभारी रहे, जिसमें उन्‍होंने पार्टी को शानदार सफलता दिलवाई.
25. 9 जुलाई 2014 को बीजेपी के अध्यक्ष चुने गए.

Friday, 6 June 2014

भोजपुरी को ८ वि अधिसूची में शामिल किया जाये - अजित कुमार पाण्डेय ( अध्यक्ष, पूर्वांचल विकास मोर्चा )

काफी समय से भोजपुरी समाज भोजपुरी को भारत की संविधान की ८वि अधिसूची मैं जोड़ने की माग कर रहा है।  आखिर भोजपुरी को राष्ट्रीय भाषा का दर्ज दिलाने के पीछे कारन क्या हैं ? इसके लिए यह समझना जरुरी होगा की देश विदेश मिला कर दुनिया भर मैं लगभग ५५ करोड़ लोग इस भाषा का  प्रयोग करते हैं।  यही नहीं फिजी और मारीशश जैसे देशों मैं तो इसे राष्ट्र्य भाषा का दर्ज मिला हुआ है , तो आखिर मैं यह क्यों नहीं हो सकता ? अगर गौर किया जाये तो यह भाषा पूर्वांचल और bihar मैं मुख्या रूप मैं बोली जाती है। यही नहीं इन क्षेत्रों के लोग दुनिया भर मैं बेस हुए हैं।  ऐसे मैं उनसे संवाद स्थापित करने मैं इस भाषा की अहम भूमिका है।  जब इस भाषा से काफी काम बोले जनि वाली भाषाओँ को यह दर्ज प्राप्त है तो इसे क्यों नहीं ?
लेकिन अब बात अलग है।  भारत के प्रधानमंत्री अब इसी क्षेत्र से सांसद हैं।  हम पूर्वांचल विकास मोर्चा की तरफ से नरेंद्र मोदी जी से इसे भारत के संविधान की ८ वि अभिसूची में शामिल करने की अपील करते हैं।  उम्मीद है प्रधानमंर्ति का ध्यान इस ओर जायेगा क्यों की बिना इस बोली के इस क्षेत्रों के आम लोगो से संवाद जोड़ना उनके लिए भी मुश्किल होगा। 

Tuesday, 3 June 2014

गोपीनाथ मुंडे का जाना, देश को बहुत बड़ा झटका

अभी तो बहुत काम बाकी था मुंडे साहब!
महाराष्ट्र के लाल का असमय जाना
प्रतिभा से मुंडे जी ने तय किया जमीन से आस्मां का सफर
महाराष्ट्र की राजनीति में छाया शून्य


एक पल को लगा कि यह समय थम सा गया जब मैंने सुना कि भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नेता गोपीनाथ मुंडे का निधन हो गया। महाराष्ट्र के इस ऊर्जावान नेता की दिल्ली के एयरपोर्ट जाते समय एक दुर्घटना के बाद दिल का दौरा पड़ने से मृत्यु हो गई। 

महाराष्ट्र राज्य से आने वाले मुंडे साहब को उनकी विशेष प्रतिभा के कारण पीएम नरेंद्र मोदी ने अपने मंत्रिमंडल में जगह दी। यहां पर उनको केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्री बनाकर पीएम ने यह जिम्मेदारी दी कि वह गांवों का विकास करें। क्योंकि पीएम साहब जानते हैं कि देश की तरक्की तभी हो सकती जब गांवों का विकास किया जाए। इस काम के लिए मुंडे साहब बेहद काबिल व्यक्ति थे। वह महाराष्ट्र के मराठवाड़ा से आते हैं। महाराष्ट्र में हमने देखा कि विगत समय में किसानों ने सबसे अधिक आत्महत्या की। दरअसल, मुंडे साहब लोगों की नब्ज पकड़ने के लिए जाने जाते थे। वह जानते थे कि कैसे देश के गांवों की बीमारू हालात को सही करके देश को विकास के पथ पर अग्रसर करना है।




बेहद साधारण परिवार में जन्मे गोपीनाथ जी ने अपनी क्षमता के बल पर यह मुकाम हासिल किया। वह भाजपा के अन्य पिछड़ा वर्ग के सशक्त नेता के रूप में विख्यात थे। वह ऐसे नेता थे जो कि कार्यकर्ताओं में काफी लोकप्रिय और काम करने के लिए सदैव आतुर दिखते थे। महाराष्ट्र की राजनीति में मुंडे बीजेपी के लिए संकटमोटचक की तरह थे। वह शिवसेना के साथ अपने रिश्ते मधुर करने के लिए जाने जाते थे। शिवसेना बीजेपी की सबसे पुरानी सहयोगी है, इसलिए उसकी अपेक्षाए भी गाहें बगाहें सामने आ जाती थी। इन अपेक्षाओं को किस तरह से विवाद में पड़ने से बचाना है, इस काम को मुंडे साहब बखूबी किया करते थे। इसलिए उनके जितने मित्र बीजेपी में है। उतने ही करीब दूसरी पार्टियों में है। महाराष्ट्र की राजनिति में मुंडे बीजेपी की धुरी थे। वह शांत स्वभाव के थे और कार्यकर्ताओं के साथ जमीनी स्तर पर काम करते थे।

मुंडे जी ने भाजपा के दिवंगत नेता प्रमोद महाजन की छत्रछाया में महाराष्ट्र की राजनीति में एक के बाद एक उपलब्धियां हासिल कीं। उनका विवाह प्रमोद महाजन की बहन के साथ हुआ था। प्रमोद ने केंद्र में पार्टी की अगुवाई की तो मुंडे साहब ने महाराष्ट्र राज्य में पार्टी के लिए सच्ची श्रद्धा के साथ काम किया। इसका इनाम उन्हें वक्त-2 पर मिलता रहा। उनको पार्टी ने हमेशा तरक्की दी और कुछ लोग यह भी मानते थे कि मुंडे साहब आगे जाकर महाराष्ट्र के सीएम भी हो सकते थे। 

मुंडे साहब का जन्म 12 दिसंबर को 1949 को हुआ था। महाराष्ट्र की राजनिति में बड़े कद के इस नेता ने पांच बार विधानसभा का प्रतिनिधित्व किया था। इस दौरान वह महाराष्ट्र विधानसभा में विपक्ष के नेता भी बने। इन कार्यकालों में मनोहर जोशी की सरकार में उप मुख्यमंत्री भी रहे। अपनी चीजों को संजोना और संवारना कोई मुंडे साहब से सीखे। उन्होंने बखूबी अपने को तराशा और आगे बढ़ते रहे। प्रमोद महाजन के निधन के बाद शून्य को भरने के लिए मुंडे साहब ने केंद्र की राजनीति में प्रवेश किया। जहां वह पहली बार बीड संसदीय सीट से सांसद बने। उनको बीड की जनता ने सिर आंखों पर बिठाकर लोकसभा जाने का रास्ता दिया। उसके बाद मोदी जी ने उनकी उपयोगिता को समझते हुए केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्री जैसा महत्वपूर्ण पद दिया।

दरअसल, महाराष्ट्र की राजनिति में तीन लोग बड़ी शिद्दत से याद किए जाएंगे... वह हैं- प्रमोद महाजन, विलास राव देशमुख और मुंडे साहब। इन्होंने भीड़ से हटकर अपनी एक पहचान बनाई। देखा जाए तो मुंडे साहब का जाना... सिर्फ एक परिवार, एक लोक सभा सीट और एक राज्य का नहीं, यह नुकसान पूरे देश का है जिसे भरने में काफी समय लगेगा।