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Monday, 28 July 2014

प्रधानमंत्री से फिर पूर्वांचल बनाने की मांग उठाई

आंध्र प्रदेश का विभाजन कर तेलंगाना राज्य बनाने की मांग पूरी होने के बाद पृथक पूर्वांचल की मांग भी जोर पकड़ने लगी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मिलकर पूर्वांचल विकास मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अजीत कुमार पाण्डेय ने पूर्वी उत्तर प्रदेश की सात करोड़ जनता के लिए अलग पूर्वाचल राज्य की मांग उठाई है।

पाण्डेय ने कहा, नेपाल से सटे होने के नाते के राष्ट्रीय सुरक्षा के लिहाज से इसकी संवेदनशीलता और प्रदेश के अन्य क्षेत्रों की तुलना में विकास के हर पैमाने पर पिछड़ेपन के मद्देनजर इस क्षेत्र को अलग राज्य का दर्जा मिले है। लंबे समय से क्षेत्र की जनता की इस मांग के पीछे की भावना का केंद्र सम्मान करे।
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पाण्डेय का तर्क था कि आबादी के लिहाज से देश के सघनतम आबाद ये क्षेत्र आजादी के बाद से ही घोर उपेक्षित है। इतनी बड़ी आबादी के लिए एक अदद केंद्रीय विश्वविद्यालय, केंद्रीय चिकित्सा, प्रोद्यौगिकी और प्रबंधन संस्थान का न होना इसका सबूत है। उद्योगों के लिहाज से भी यह क्षेत्र शून्य है। सार्वजनिक क्षेत्र की एक मात्र इकाई खाद कारखाने को बंद हुए दो दशक से अधिक हो गए। इसके बाद से पूरे क्षेत्र में सार्वजनिक या निजी क्षेत्र की एक भी बड़ी इकाई नहीं लगी। कभी गन्ना यहां की नकदी फसल थी और चीनी उद्योग पहचान, पर सरकारी उपेक्षा के नाते मिलें एक-एक कर बंद होती गई।

सीमावर्ती क्षेत्र होने के नाते यह इलाका राष्ट्रीय सुरक्षा के लिहाज से भी बेहद संवेदनशील है। ऐसे में जिस तरह उत्तराखंड, झारखंड, छत्तीसगढ़ राज्य का गठन हुआ और जिस तरह हाल में केंद्रीय कैबिनेट ने तेलंगाना के गठन की सहमति दी उसी तरह अलग पूर्वाचल राज्य के गठन की भी सहमति दे।

रस्तावित पूर्वांचल राज्य में सोनपुर और इलाहाबाद मंडल से लेकर बस्ती मंडल तक कुल 27 जिले, 149 विधानसभा सीटें और 29 लोकसभा की सीटें होंगी। इसकी राजधानी वाराणसी होगी। पूर्वांचल की आठ करोड़ की आबादी में 20 लाख से अधिक शिक्षित बेरोजगार हैं।

Saturday, 12 July 2014

बेहतर आर्थिक प्रबंधन का उदाहरण है यह बजट

पूर्वांचल विकास मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अजीत कुमार पाण्डेय ने बजट को बेहतर आर्थिक प्रबंधन का उदाहरण बताया है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी महँगाई कम करने के प्रयास कर रहे हैं। यह बजट उसी दिशा में एक अच्छा और सार्थक कदम है।

पाण्डेय ने ने कहा कि वर्तमान परिस्थिति में यह अद्भुत बजट है इसमें कोई नया कर नहीं लगाया गया है। बल्कि करों के बोझ को कम किया गया है। कृषि उपकरण जैसी कई जनोपयोगी वस्तुओं पर से कर कम किया गया है। इससे यह वस्तुएँ सस्ती होंगी।

बजट में कृषि, सिंचाई, अधोसंरचना विकास, ग्रामीण विकास, विद्युत, पेयजल आदि सभी क्षेत्रों के लिये पर्याप्त आवंटन किया गया है। नर्मदा-क्षिप्रा लिंक परियोजना लागू करने के बाद अब नर्मदा-गंभीर परियोजना के लिये इस बजट में प्रावधान किया गया है।

बजट में शिक्षा, स्वास्थ्य, महिला सशक्तिकरण को ध्यान में रखते हुए समुचित व्यवस्था की गई है। इसमें निवेशकों को आकर्षित करने तथा गरीबों को रोजगार देने के कार्यक्रमों को शामिल किया गया है। अत्यंत आवश्यक वस्तुओं पर से करों को कम कर राहत देने का काम किया गया है। यह बजट समाज के हर वर्ग की बेहतरी का प्रयास है।

Wednesday, 9 July 2014

अमित शाह बने बीजेपी के शहंशाह

राजधानी दिल्ली के 11 अशोका रोड स्थित बीजेपी मुख्यालय में अमित शाह को भारतीय जनता पार्टी का नया अध्यक्ष चुना गया. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शाह को मिठाई खिलाकर बधाई दी. 2014 के लोकसभा चुनाव में यूपी प्रभारी रहे अमित शाह को अध्यक्ष पद मिलना उनकी सफलता की कहानी कह रहा है. आइए नजर डालते हैं मुंबई में 22 अक्‍टूबर 1994 को जन्‍मे अमित अनिलचंद्र शाह के जीवन से जुड़े उस हर पहलू पर जो आपके लिए जानना जरूरी है.

रईस परिवार से ताल्‍लुक रखते हैं शाह
1.
मोदी के ठीक उलट अमित शाह गुजरात के एक रईस परिवार से ताल्लुक रखते थे.
2.
मनसा में प्लास्टिक के पाइप का पारिवारिक बिजनेस संभालते थे.
3. मेहसाणा में शुरुआती पढ़ाई के बाद बॉयोकेमिस्ट्री की पढ़ाई के लिए अहमदाबाद आए.
4.
अमित शाह ने बॉयोकेमिस्ट्री में बीएससी की, इसके बाद पिता का बिजनेस संभालने में जुट गए.
5. बचपन से ही शाह का संबंध आरएसएस के साथ रहा, कॉलेज के दिनों में वह आरएसएस के स्वयंसेवक बने.
6. 1982 में नरेंद्र मोदी से उनकी पहली मुलाकात हुई.
7. 1983 में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद से जुड़े और इस तरह उनका राजनीतिक करियर शुरू हुआ.
8. मोदी से एक साल पहले उन्होंने 1986 में बीजेपी ज्वाइन किया.
9. 1987 में अमित शाह भारतीय जनता युवा मोर्चा के सदस्य बने.
10. 1999 में अहमदाबाद डिस्ट्रिक्ट कोऑपरेटिव बैंक (एडीसीबी) के प्रेसिडेंट चुने गए.
11. 1997 में मोदी ने सरखेज के उपचुनाव में अमित शाह को उतारने की सलाह दी.
12. फरवरी 1997 में उपचुनाव जीतकर शाह विधायक बने.
13. 1998 के चुनाव में उन्होंने चुनाव जीतकर अपनी सीट बरकरार रखी.
14. 1997 से 2012 तक वे सरखेज से विधायक रहे.
15. 2009 में गुजरात क्रिकेट एसोसिएशन के वाइस प्रेसिडेंट बने.
16. 2013 में नरनपुरा से विधायक चुने गए.
17. 2014 में मोदी के पद छोड़ने के बाद GCA के प्रेसिडेंट बने.
18. 2003 से 2010 तक गुजरात सरकार की कैबिनेट में गृहमंत्रालय का जिम्मा संभाला.
19. शाह को पहला बड़ा राजनीतिक मौका मिला 1991 में, जब आडवाणी के लिए गांधीनगर संसदीय क्षेत्र में उन्होंने चुनाव प्रचार का जिम्मा संभाला.
20. इसी तरह का मौका 1996 में भी अमित शाह के पास आया. जब अटल बिहारी वाजपेयी ने गुजरात से चुनाव लड़ना तय किया. मोदी के कहने पर उस चुनाव की पूरी जिम्मेदारी फिर से अमित शाह को ही सौंपी गई. उस समय वाजपेयी पूरे देश में पार्टी का प्रचार कर रहे थे. उन्होंने अपने क्षेत्र में न के बराबर समय दिया. पूरा दारोमदार अमित शाह ने अपने कंधे पर उठाया.
21. 2002 में नरेंद्र मोदी की सरकार बनी में सबसे कम उम्र के अमित शाह को गृह (राज्य) मंत्री बनाया गया.
22. अभी तक अमित शाह ने कुल 42 छोटे-बड़े चुनाव लड़े लेकिन उनमें से एक में उन्होंने हार का सामना नहीं किया.
23. सोहराबुद्दीन शेख की फर्जी मुठभेड़ के मामले में अमित शाह को 2010 में गिरफ्तारी का सामना करना पड़ा. शाह पर आरोपों का सबसे बड़ा हमला खुद उनके बेहद खास रहे गुजरात पुलिस के निलंबित अधिकारी डीजी बंजारा ने किया.
24. 2014 लोकसभा चुनाव में यूपी में बीजेपी प्रभारी रहे, जिसमें उन्‍होंने पार्टी को शानदार सफलता दिलवाई.
25. 9 जुलाई 2014 को बीजेपी के अध्यक्ष चुने गए.

Friday, 6 June 2014

भोजपुरी को ८ वि अधिसूची में शामिल किया जाये - अजित कुमार पाण्डेय ( अध्यक्ष, पूर्वांचल विकास मोर्चा )

काफी समय से भोजपुरी समाज भोजपुरी को भारत की संविधान की ८वि अधिसूची मैं जोड़ने की माग कर रहा है।  आखिर भोजपुरी को राष्ट्रीय भाषा का दर्ज दिलाने के पीछे कारन क्या हैं ? इसके लिए यह समझना जरुरी होगा की देश विदेश मिला कर दुनिया भर मैं लगभग ५५ करोड़ लोग इस भाषा का  प्रयोग करते हैं।  यही नहीं फिजी और मारीशश जैसे देशों मैं तो इसे राष्ट्र्य भाषा का दर्ज मिला हुआ है , तो आखिर मैं यह क्यों नहीं हो सकता ? अगर गौर किया जाये तो यह भाषा पूर्वांचल और bihar मैं मुख्या रूप मैं बोली जाती है। यही नहीं इन क्षेत्रों के लोग दुनिया भर मैं बेस हुए हैं।  ऐसे मैं उनसे संवाद स्थापित करने मैं इस भाषा की अहम भूमिका है।  जब इस भाषा से काफी काम बोले जनि वाली भाषाओँ को यह दर्ज प्राप्त है तो इसे क्यों नहीं ?
लेकिन अब बात अलग है।  भारत के प्रधानमंत्री अब इसी क्षेत्र से सांसद हैं।  हम पूर्वांचल विकास मोर्चा की तरफ से नरेंद्र मोदी जी से इसे भारत के संविधान की ८ वि अभिसूची में शामिल करने की अपील करते हैं।  उम्मीद है प्रधानमंर्ति का ध्यान इस ओर जायेगा क्यों की बिना इस बोली के इस क्षेत्रों के आम लोगो से संवाद जोड़ना उनके लिए भी मुश्किल होगा। 

Tuesday, 3 June 2014

गोपीनाथ मुंडे का जाना, देश को बहुत बड़ा झटका

अभी तो बहुत काम बाकी था मुंडे साहब!
महाराष्ट्र के लाल का असमय जाना
प्रतिभा से मुंडे जी ने तय किया जमीन से आस्मां का सफर
महाराष्ट्र की राजनीति में छाया शून्य


एक पल को लगा कि यह समय थम सा गया जब मैंने सुना कि भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नेता गोपीनाथ मुंडे का निधन हो गया। महाराष्ट्र के इस ऊर्जावान नेता की दिल्ली के एयरपोर्ट जाते समय एक दुर्घटना के बाद दिल का दौरा पड़ने से मृत्यु हो गई। 

महाराष्ट्र राज्य से आने वाले मुंडे साहब को उनकी विशेष प्रतिभा के कारण पीएम नरेंद्र मोदी ने अपने मंत्रिमंडल में जगह दी। यहां पर उनको केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्री बनाकर पीएम ने यह जिम्मेदारी दी कि वह गांवों का विकास करें। क्योंकि पीएम साहब जानते हैं कि देश की तरक्की तभी हो सकती जब गांवों का विकास किया जाए। इस काम के लिए मुंडे साहब बेहद काबिल व्यक्ति थे। वह महाराष्ट्र के मराठवाड़ा से आते हैं। महाराष्ट्र में हमने देखा कि विगत समय में किसानों ने सबसे अधिक आत्महत्या की। दरअसल, मुंडे साहब लोगों की नब्ज पकड़ने के लिए जाने जाते थे। वह जानते थे कि कैसे देश के गांवों की बीमारू हालात को सही करके देश को विकास के पथ पर अग्रसर करना है।




बेहद साधारण परिवार में जन्मे गोपीनाथ जी ने अपनी क्षमता के बल पर यह मुकाम हासिल किया। वह भाजपा के अन्य पिछड़ा वर्ग के सशक्त नेता के रूप में विख्यात थे। वह ऐसे नेता थे जो कि कार्यकर्ताओं में काफी लोकप्रिय और काम करने के लिए सदैव आतुर दिखते थे। महाराष्ट्र की राजनीति में मुंडे बीजेपी के लिए संकटमोटचक की तरह थे। वह शिवसेना के साथ अपने रिश्ते मधुर करने के लिए जाने जाते थे। शिवसेना बीजेपी की सबसे पुरानी सहयोगी है, इसलिए उसकी अपेक्षाए भी गाहें बगाहें सामने आ जाती थी। इन अपेक्षाओं को किस तरह से विवाद में पड़ने से बचाना है, इस काम को मुंडे साहब बखूबी किया करते थे। इसलिए उनके जितने मित्र बीजेपी में है। उतने ही करीब दूसरी पार्टियों में है। महाराष्ट्र की राजनिति में मुंडे बीजेपी की धुरी थे। वह शांत स्वभाव के थे और कार्यकर्ताओं के साथ जमीनी स्तर पर काम करते थे।

मुंडे जी ने भाजपा के दिवंगत नेता प्रमोद महाजन की छत्रछाया में महाराष्ट्र की राजनीति में एक के बाद एक उपलब्धियां हासिल कीं। उनका विवाह प्रमोद महाजन की बहन के साथ हुआ था। प्रमोद ने केंद्र में पार्टी की अगुवाई की तो मुंडे साहब ने महाराष्ट्र राज्य में पार्टी के लिए सच्ची श्रद्धा के साथ काम किया। इसका इनाम उन्हें वक्त-2 पर मिलता रहा। उनको पार्टी ने हमेशा तरक्की दी और कुछ लोग यह भी मानते थे कि मुंडे साहब आगे जाकर महाराष्ट्र के सीएम भी हो सकते थे। 

मुंडे साहब का जन्म 12 दिसंबर को 1949 को हुआ था। महाराष्ट्र की राजनिति में बड़े कद के इस नेता ने पांच बार विधानसभा का प्रतिनिधित्व किया था। इस दौरान वह महाराष्ट्र विधानसभा में विपक्ष के नेता भी बने। इन कार्यकालों में मनोहर जोशी की सरकार में उप मुख्यमंत्री भी रहे। अपनी चीजों को संजोना और संवारना कोई मुंडे साहब से सीखे। उन्होंने बखूबी अपने को तराशा और आगे बढ़ते रहे। प्रमोद महाजन के निधन के बाद शून्य को भरने के लिए मुंडे साहब ने केंद्र की राजनीति में प्रवेश किया। जहां वह पहली बार बीड संसदीय सीट से सांसद बने। उनको बीड की जनता ने सिर आंखों पर बिठाकर लोकसभा जाने का रास्ता दिया। उसके बाद मोदी जी ने उनकी उपयोगिता को समझते हुए केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्री जैसा महत्वपूर्ण पद दिया।

दरअसल, महाराष्ट्र की राजनिति में तीन लोग बड़ी शिद्दत से याद किए जाएंगे... वह हैं- प्रमोद महाजन, विलास राव देशमुख और मुंडे साहब। इन्होंने भीड़ से हटकर अपनी एक पहचान बनाई। देखा जाए तो मुंडे साहब का जाना... सिर्फ एक परिवार, एक लोक सभा सीट और एक राज्य का नहीं, यह नुकसान पूरे देश का है जिसे भरने में काफी समय लगेगा।

Monday, 2 June 2014

Condolences On Gopinath Munde Death

It’s a very shocking and sad to know about the death of our friend Gopinath Munde which is very unfurnate for all, in a tragedy, union Minister Gopinath Munde has passed away in a road accident, leaving country to a massive blow.



Death of Mr. Gopinath Munde is a massive lost for the us and for country; we express condolences to Munde ji’s family and stand by them in this hour of grief. My heartfelt condolences to the bereaved family.
Munde Ji was a true leader who came from a backward section society, but he rose to a great height and served people as much as he can. He was the true fighter who always stands for the people and tries to help them in every condition.

 


In Lok Sabha election he had won by a massive margin which shows how much people love him and how much they wants him to be the person who can serve them. His lost is irreparable for country and for BJP.

Its not only difficult, its impossible for the party to fill his gap with any other. Nation has lost a tall leader. Munde was one of the few leaders who had severed country from a long time.

No matter where he is now, but he will always be with us.

Wednesday, 28 May 2014

सबसे बड़े महारथी, सबड़े बड़े `लड़ैया`


दुनिया के महानतम संतों में शुमार होनेवाले स्वामी विवेकानंद को वेद की एक सूक्ति बड़ी प्रिय थी और इसका जिक्र उन्होंने युवाओं को प्रेरित करने के लिए बार-बार किया है। उतिष्ठित, जाग्रत, प्राप्य वरान्निबोधत् यानी उठो जागो और तबतक चलते रहो जबतक की लक्ष्य की प्राप्त नहीं हो जाए। यह सूक्ति वह युवाओं को प्रेरित करने के लिए कहते थे। वेदों की एक और सूक्ति की तरफ चलते हैं - `चरैवेति-चरैवेति` यानी चलते रहो, चलते रहो। यानी जीवन रूकने का नहीं बल्कि चलने का नाम है और मकसद तो चलने से ही हासिल होता है। यानी हर स्थिति और परिस्थिति में आगे ही बढ़ते जाने का नाम जीवन है। जीवन में निराश और हताश होकर लक्ष्य की प्राप्ति नहीं की जा सकती। जो हमारा समय निकल गया उसकी चिंता छोड़े। जो जीवन शेष बचा है उसके बारे में विचार करे।

..ये दोनों सूक्तियां आज लोकसभा चुनाव के परिणामों के मद्देनजर सबसे बड़े महारथी, सबड़े बड़े `लड़ैया`, सियासी विजेता नरेंद्र मोदी पर लागू होती है। उन्होंने आज देश की सबसे बड़ी सियासी जीत को हासिल करने के साथ ही यह साबित कर दिया कि उन्हें जीतने और विजय श्री के वरण करने तक रुकने या आराम फरमाने का शौक नहीं है। यह कहना गलत नहीं होगा कि मोदी 65 साल के करीब है लेकिन चुनाव में उन्होंने एक युवा जैसी ऊर्जा से लबरेज होकर लड़ाई लड़ी, चुनाव प्रचार किया और सबको अचंभित कर दिया। अंतत: जीत बीजेपी की हुई और कांग्रेस सत्ता से बाहर हो गई। मोदी के नेतृत्व में बीजेपी केंद्र की सत्ता पर काबिज हो गई ओर भगवा परचम लहरा दिया। 1984 के बाद पहली बार लोकसभा चुनाव में किसी पार्टी को स्पष्ट बहुमत मिला है। यानी 30 साल बाद किसी पार्टी को स्पष्ट बहुमत हासिल हुई जो यह बताता है कि देश की जनता सही मायने में कांग्रेस से मुक्ति चाहती थी और देश की सियासत में बदलाव लाना चाहती थी।

केंद्र की सियासत में इस प्रचंड ऐतिहासिक जीत के कई मायने है जहां मोदी की अगुवाई में बीजेपी ना सिर्फ सत्ता पर काबिज हुई बल्कि उसने कांग्रेस का घमंड चकनाचूर कर दिया और परिवारवाद की परंपरा को खत्म कर दिया। बीजेपी इस बार के चुनाव में पहली बार अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करते हुए बहुमत के आंकड़े को अपने दम पर हासिल कर लिया। एनडीए को मोदी की अगुवाई में इतनी शानदार जीत हासिल होगी यह किसी ने सोचा भी नहीं था। लेकिन मोदी मैजिक और मोदी की लहर का असर इस बार सबपर भारी पड़ा और अंतत: इन सबने मोदी की विजय की पटकथा सियासी पटल पर लिखी दी।

नरेंद्र मोदी ने कई बार अपने चुनावी भाषणों में कहा था कांग्रेस इस बार के चुनाव में खाता तक नहीं खोल पाएगी। राजस्थान, गुजरात और गोवा इन तीन राज्यों में जो मोदी ने कहा वैसा ही हुआ। राजस्थान में 25,गुजरात में 26 और गोवा में 2 सीटों पर बीजेपी ने काबिज होकर कांग्रेस का सूपड़ा साफ कर दिया। चुनाव में मोदी आंधी की तरह नहीं सुनामी की तरह आए और कांग्रेस को बहाकर सत्ता से किनारे कर दिया।

अपने ताबड़तोड़ चुनाव प्रचार अभियान के दौरान विकास को अपना मुख्य मुद्दा बनाते हुए मोदी ने देश की युवा शक्ति ,मध्यवर्ग और ग्रामीण लोगों को ‘बदलाव की बयार ’ लाने का भरोसा दिलाने के लिए संपर्क साधने की पुरजोर कोशिश की और शायद उनकी यही कोशिश रंग लाई हालांकि बीच बीच में कभी कभार भगवा ताकतों के कुछ पसंदीदा विषयों को उठाकर मतदाताओं का ध्रुवीकरण करने की कोशिशें भी उनके अभियान में दिखीं । एक कुशल योजनाकार मोदी ने ,रेलवे स्टेशन पर चाय बेचने वाले से लेकर भारत का एक लोकप्रिय नेता बनने तक का सफर बड़ी सफलता से पूरा किया हालाकि उनके बहुत से विरोधी उनके इस दावे से सहमत नहीं हैं कि वे कभी चाय भी बेचा करते थे । भाजपा ने उनके नेतृत्व में जबरदस्त बहुमत प्राप्त करने का ऐसा कारनामा अंजाम दिया है जैसा 1984 में राजीव गांधी के नेतृत्व में कांग्रेस ने 400 से ज्यादा सीटों पर जीत दर्ज कर किया था और ऐसा इस बीच कोई भी अन्य दल नहीं कर पाया ।

13 सितंबर 2013 को मोदी को बीजेपी के प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार का दायित्व पार्टी ने दिया। उसके बाद वह ऐसा जुटे कि विजय गाथा की पटकथा लिखने के बाद ही रुके। 2014 के लोकसभा चुनावों की घोषणा हुई। 26 मार्च 2014 को मां वैष्‍णो देवी के आशीर्वाद के बाद उन्होंने विजय रैली का शुभारंभ किया । मां से उन्होंने आशीर्वाद लिया और जुट गए चुनाव प्रचार के विजय अभियान में। पहली रैली उन्होंने जम्मू-कश्मीर में की और अपनी आखिरी रैली पूर्वी उत्‍तर प्रदेश में बलिया में की जो 1857 की क्रांति के नायक मंगल पांडेय की भूमि है।

एक महीने के भीतर 12 दौर में 1350 स्‍थानों पर 3डी रैलियां संबोधित कीं। इस दौरान रैलिया, 3डी सभायें, चाय पे चर्चा आदि को मिला कर मोदी ने लगभग 5800 कार्यक्रम किये | 3 लाख किलोमीटर की यात्रा कर पूरे भारतवर्ष में 440 कार्यक्रम और रैलियां संबोधित की। इसमें भारत विजय रैलियां भी शामिल हैं जिनकी शुरुआत 26 मार्च 2014 से हुई थी । साथ ही इस दौरान भारत विजय 3डी रैलियों के रूप में एक ओर अभिनव प्रयोग हुआ। 3डी रैलियों के प्रति लोगों का उत्साह गजब का था।

मोदी बिना रुके, बिना थके अनवरत मेहनत करते रहे। आलम यह था कि वह एक दिन में चार से लेकर छह रैलियों तक को संबोधित कर रहे थे। कई हफ्तों तक उनका गला बैठ गया। फिर भी वह सियासात की बेहतरी की खातिर चिल्लाते रहे, गरजते रहे, जनता से वोट देने की अपील करते रहे। उनका चुनावी अभियान किसी मैराथन से कम नहीं था। मोदी ने अपने धुंआधार प्रचार अभियान से लोकसभा चुनाव प्रचार का रिकार्ड ब्रेक कर दिया। मोदी ने इस दौरान देश भर में तीन लाख किलोमीटर से अधिक दूरी तय कर एक अनूठा रिकार्ड बना दिया। कुल 5827 कार्यक्रमों में भाग लिया।

उन्होंने बीते साल सितंबर महीने से अब तक 25 राज्यों में 437 जनसभाओं को संबोधित किया और 1350 3डी रैलियों में शिरकत की। 5827 सार्वजनिक कार्यक्रमों के जरिये मोदी ने करीब 10 करोड़ लोगों तक अपनी पहुंच बनाई। मोदी का यह प्रचार अभियान ‘ऐतिहासिक’ और ‘अभूतपूर्व’ कहा जा सकता है। इस दौरान वह देश के हर राज्य और बड़े शहर में जा पहुंचे। पूरे देश को नाप लिया। मोदी चलते गए, बढ़ते गए और उन्होंने आखिरकार मुख्यमंत्री से प्रधानमंत्री बनकर ही दम लिया।

मोदी ने इस ऐतिहासिक जीत के बाद ट्वीट कर कहा भी- `यह जीत भारत की है और अच्छे दिन आनेवाले हैं।` मोदी की वेबसाइट उनके संकल्प को हर क्लिक पर और हर पल दोहराती नजर आती है- `सौगंध मुझे इस मिट्टी की मैं देश नहीं मिटने दूगा । मै देश नहीं झुकने दूंगा।` अब जनता ने देश का नेतृत्व मोदी के हाथों देकर उन्हें प्रधानमंत्री का दायित्व सौंप दिया है। अब देश की जनता के सामने उम्मीदें मोदी की नीति और नीयत से होंगी। उन मुश्किलों से निजात दिलाने से होंगी जो जनता चाहती है। मोदी हर कसौटी पर खरा उतरेंगे यह उम्मीदें सबको होंगी।