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Wednesday, 21 October 2015

आप और आप के परिवार को विजयादशमी की शुभकामनांए

किसी की जीत किसी की हार बन गई।
वो विजय आज त्यौहार बन गई,
मुझे भी लड़ना है, 
और जीतना है, 
मेरे अंदर के रावण से 
बाहर के अनेकों रावणों पर विजय पानी है,
मुझे भी विजयदशमी मनानी है।
 बुराई पर अच्छाई की जीत के पावन पर्व पर सभी देशवासियों को हार्दिक शुभकामनाएं। आप और आप के परिवार को विजयादशमी की शुभकामनांए.

Thursday, 17 September 2015

हमारे प्रधानमंत्री को जन्मदिन की गर्मजोशी भरी बधाई


प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी को पूर्वांचल विकास मोर्चा की तरफ से जन्मदिन की बधाई. हम उनके अच्छे स्वास्थ्य और उनकी लंबी आयु की कामना करता हूं. देश की सेवा करने के लिए ईश्वर आपको लंबी आयु दे.

समावेशी विकास यात्रा पर निकल पड़े हैं श्री नरेंद्र मोदी




भारत के लोकप्रिय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी को जन्मदिन पर हार्दिक बधाई। यह संयोग है कि आज सृष्टि के शिल्पी भगवान विश्वकर्मा की भी पूजा है। हम गौरवान्वित हैं कि हम सृष्टि के शिल्पी के साथ नए भारत के शिल्पकार माननीय नरेंद्र मोदी जी का भी जन्मदिन मना रहे हैं।
नरेंद्र मोदी को अपने बाल्यकाल से कई तरह की विषमताओं एवं विपरीत परिस्थितियों का सामना करना पड़ा है, किन्तु अपने उदात्त चरित्रबल एवं साहस से उन्होंने तमाम अवरोधों को अवसर में बदल दिया, विशेषकर जब उन्होने उच्च शिक्षा हेतु कॉलेज तथा विश्वविद्यालय में प्रवेश लिया। उन दिनों वे कठोर संद्यर्ष एवं दारुण मन:ताप से घिरे थे, परन्तु् अपने जीवन- समर को उन्होंने सदैव एक योद्धा- सिपाही की तरह लड़ा है। आगे क़दम बढ़ाने के बाद वे कभी पीछे मुड़ कर नहीं देखते, साथ-साथ पराजय उन्हें स्वीकार्य नहीं है। अपने व्यक्तित्व की इन्हीं विशेषताओं के चलते उन्होंने राजनीति शास्त्र विषय के साथ अपनी एम.ए की पढ़ाई पूरी की।
नरेन्द्र मोदी ने 26 मई 2014 को भारत के प्रधानमंत्री पद की शपथ ली और वे भारत के प्रथम प्रधानमंत्री हैं जिनका जन्म आजादी के बाद हुआ है। ऊर्जावान, समर्पित एवं दृढ़ निश्चय वाले नरेन्द्र मोदी एक अरब से अधिक भारतीयों की आकांक्षाओं और आशाओं के द्योतक हैं।
मई 2014 में अपना पद संभालने के बाद से ही प्रधानमंत्री मोदी चहुंमुखी और समावेशी विकास की यात्रा पर निकल पड़े हैं जहां हर भारतीय अपनी आशाओं और आकांक्षाओं को पूरा कर सके। वे ‘अंत्योदय’, अर्थात, अंतिम व्यक्ति तक सेवा पहुंचाने के सिद्धांत से अत्यधिक प्रेरित हैं। नवीन विचारों और पहल के माध्यम से सरकार ने यह सुनिश्चित किया है कि प्रगति की रफ्तार तेज हो और हर नागरिक को विकास का लाभ मिले। अब शासन मुक्त है, इसकी प्रक्रिया आसान हुई है एवं इसमें पारदर्शिता आई है।
पहली बार प्रधानमंत्री जन-धन योजना के माध्यम से अभूतपूर्व बदलाव आया है जिसके अंतर्गत यह सुनिश्चित किया गया है कि देश के सभी नागरिक वित्तीय तंत्र में शामिल हों। कारोबार को आसान बनाने के अपने लक्ष्य को केंद्र में रखकर ‘मेक इन इंडिया’ के उनके आह्वान से निवेशकों और उद्यमियों में अभूतपूर्व उत्साह और उद्यमिता के भाव का संचार हुआ है। ‘श्रमेव जयते’ पहल के अंतर्गत श्रम सुधारों और श्रम की गरिमा से लघु और मध्यम उद्योगों में लगे अनेक श्रमिकों का सशक्तिकरण हुआ है और देश के कुशल युवाओं को भी प्रेरणा मिली है।
पहली बार भारत सरकार ने भारत के लोगों के लिए तीन सामाजिक सुरक्षा योजनाओं की शुरुआत की और साथ-ही-साथ बुजुर्गों को पेंशन एवं गरीबों को बीमा सुरक्षा देने पर भी ध्यान केंद्रित किया है। जुलाई 2015 में प्रधानमंत्री ने डिजिटल इंडिया बनाने के उद्देश्य से डिजिटल इंडिया मिशन की शुरुआत की ताकि प्रौद्योगिकी की मदद से लोगों के जीवन में बेहतर बदलाव लाए जा सकें।
2 अक्टूबर 2014 को महात्मा गांधी की जयंती पर प्रधानमंत्री ने ‘स्वच्छ भारत मिशन - देशभर में स्वच्छता के लिए एक जन-आंदोलन’ की शुरुआत की। इस अभियान की व्यापकता एवं इसका प्रभाव ऐतिहासिक है।
नरेन्द्र मोदी की विदेश नीति से संबंधित विभिन्न पहल में विश्व के सबसे बड़े लोकतंत्र भारत की वैश्विक मंच पर वास्तविक क्षमता एवं भूमिका की छाप दिखती है। उन्होंने सभी सार्क देशों के राष्ट्राध्यक्षों की उपस्थिति में अपने कार्यकाल की शुरुआत की। संयुक्त राष्ट्र महासभा में दिए गए उनके भाषण की दुनिया भर में प्रशंसा हुई। नरेन्द्र मोदी भारत के ऐसे प्रथम प्रधानमंत्री बने जिन्होंने 17 वर्ष के लंबे अंतराल के बाद नेपाल, 28 वर्ष बाद ऑस्ट्रेलिया, 31 वर्ष बाद फिजी और 34 वर्ष बाद सेशेल्स की द्विपक्षीय यात्रा की। पदभार ग्रहण करने के बाद से नरेन्द्र मोदी ने संयुक्त राष्ट्र, ब्रिक्स, सार्क और जी-20 शिखर सम्मेलनों में भाग लिया, जहां अनेक प्रकार के वैश्विक, आर्थिक और राजनैतिक मुद्दों पर भारत के कार्यक्रमों एवं विचारों की जबर्दस्त सराहना की गई। जापान की उनकी यात्रा से भारत-जापान संबंधों में एक नए युग की शुरुआत हुई। वे मंगोलिया की यात्रा करने वाले प्रथम भारतीय प्रधानमंत्री हैं और चीन व दक्षिण कोरिया की उनकी यात्राएं भारत में निवेश लाने की दृष्टि से कामयाब रही हैं। फ्रांस और जर्मनी की अपनी यात्रा के दौरान वे यूरोप के साथ निरंतर जुड़े रहे।
श्री नरेन्द्र मोदी ने अरब देशों के साथ मजबूत संबंधों को काफी महत्व दिया है। अगस्त 2015 में संयुक्त अरब अमीरात की उनकी यात्रा 34 साल में किसी भारतीय प्रधानमंत्री की पहली यात्रा थी जिसके दौरान उन्होंने खाड़ी देशों के साथ भारत की आर्थिक भागीदारी को बढ़ाने के लिए व्यापक स्तर पर पहल की। जुलाई 2015 में श्री मोदी ने पांच मध्य एशियाई देशों का दौरा किया। यह यात्रा अपने-आप में खास एवं विशेष रही। भारत और इन देशों के बीच ऊर्जा, व्यापार, संस्कृति और अर्थव्यवस्था जैसे क्षेत्रों में महत्वपूर्ण समझौते हुए।
ऑस्ट्रेलिया के राष्ट्रपति टोनी अबॉट, चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग, श्रीलंका के राष्ट्रपति मैत्रीपाल सिरिसेना एवं रूस के राष्ट्रपति ब्लादीमीर पुतिन सहित विश्व के कई अन्य नेताओं ने भारत का दौरा किया है एवं इन दौरों से भारत व इन देशों के बीच सहयोग सुधारने में सफलता मिली है। वर्ष 2015 के गणतंत्र दिवस पर राष्ट्रपति बराक ओबामा प्रमुख अतिथि के रूप में भारत दौरे पर आए जो भारत-अमेरिका संबंधों के इतिहास में पहली बार हुआ है। अगस्त 2015 में भारत ने एफआईपीआईसी शिखर सम्मेलन की मेजबानी की जिसमें प्रशांत द्वीप समूह के शीर्ष नेताओं ने भाग लिया। इस दौरान प्रशांत द्वीप समूह के साथ भारत के संबंधों से जुड़े महत्वपूर्ण पहलुओं पर चर्चा की गई।
किसी भी एक दिन को “अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस” के रूप में मनाए जाने के नरेन्द्र मोदी के आह्वान को संयुक्त राष्ट्र में जबर्दस्त समर्थन प्राप्त हुआ। पहली बार विश्व भर के 177 देशों ने एकजुट होकर 21 जून को “अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस” के रूप में मनाए जाने का संकल्प संयुक्त राष्ट्र में पारित किया।
उनका जन्म 17 सितम्बर 1950 को गुजरात के छोटे से शहर में हुआ जहां वे गरीब किन्तु स्नेहपूर्ण परिवार में बड़े हुए। जीवन की आरंभिक कठिनाइयों ने न केवल उन्हें कठिन परिश्रम का मूल्य सिखाया बल्कि उन अपरिहार्य दुखों से भी परिचित कराया जिससे आम जनों को अपने दैनिक जीवन में गुजरना पड़ता है। इससे उन्हें अल्पायु में ही स्वयं को आमजन एवं राष्ट्र की सेवा में समर्पित करने की प्रेरणा मिली। प्रारंभिक वर्षों में उन्होंने राष्ट्र निर्माण के लिए समर्पित राष्ट्रवादी संगठन, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के साथ कार्य किया एवं इसके उपरांत वे राज्य स्तर व राष्ट्रीय स्तर पर भारतीय जनता पार्टी संगठन के साथ कार्य करते हुए राजनीति से जुड़ गए।
वर्ष 2001 में वे अपने गृह राज्य गुजरात के मुख्यमंत्री बने। उन्होंने मुख्यमंत्री के रूप में चार गौरवपूर्ण कार्यकाल पूरे किए। उन्होंने विनाशकारी भूकंप के दुष्प्रभावों से जूझ रहे गुजरात को विकास रुपी इंजन के रूप में परिवर्तित कर दिया जो आज भारत के विकास में महत्वपूर्ण योगदान दे रहा है।
नरेन्द्र मोदी एक जन-नेता हैं जो लोगों की समस्याओं को दूर करने तथा उनके जीवन स्तर में सुधार लाने के लिए प्रतिबद्ध हैं। उन्हें लोगों के बीच जाना, उनकी खुशियों में शामिल होना तथा उनके दुखों को दूर करना बहुत अच्छा लगता है। जमीनी स्तर पर लोगों के साथ गहरा निजी संपर्क होने के साथ-साथ वे ऑनलाइन भी उपलब्ध हैं। तकनीक के प्रति प्रेम एवं उसमें समझ रखने वालों नेताओं में वे भारत के सबसे बड़े राजनेता हैं। वेबसाइट के माध्यम से लोगों तक पहुंचने और उनके जीवन में बदलाव लाने के लिए वे हमेशा कार्यरत हैं। वे सोशल मीडिया, जैसे - फेसबुक, ट्विटर, गूगल प्लस, इन्स्टाग्राम, साउंड क्लाउड, लिंक्डइन, वीबो तथा अन्य प्लेटफार्म पर भी काफी सक्रिय हैं।
राजनीति के अलावा नरेन्द्र मोदी को लेखन का भी शौक है। उन्होंने कई पुस्तकें लिखी हैं, जिनमें कविताएं भी शामिल हैं। वे अपने दिन की शुरुआत योग से करते हैं। योग उनके शरीर और मन के बीच सामंजस्य स्थापित करता है एवं बेहद भागदौड़ की दिनचर्या में उनमें शांति का संचार करता है।

Saturday, 5 September 2015

श्रीकृष्ण जन्माष्टमी पर्व की हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं

भगवान श्रीकृष्ण को प्रेम का अवतार माना जाता है। उन्होंने इस दुनिया को प्रेम का सच्चा पाठ पढ़ाया।

जब-जब भी असुरों के अत्याचार बढ़े हैं और धर्म का पतन हुआ है तब-तब भगवान ने पृथ्वी पर अवतार लेकर सत्य और धर्म की स्थापना की है।

इसी कड़ी में भाद्रपद माह की कृष्ण पक्ष की अष्टमी को मध्यरात्रि को अत्याचारी कंस का विनाश करने के लिए मथुरा में भगवान कृष्ण ने अवतार लिया।

चूँकि भगवान स्वयं इस दिन पृथ्वी पर अवतरित हुए थे अतः इस दिन को कृष्ण जन्माष्टमी अथवा जन्माष्टमी के रूप में मनाते हैं। इस दिन स्त्री-पुरुष रात्रि बारह बजे तक व्रत रखते हैं। इस दिन मंदिरों में झाँकियाँ सजाई जाती हैं और भगवान कृष्ण को झूला झुलाया जाता है।

प्रेम के प्रतीक भगवान् के जन्मदिन को सच्ची लगन एवं प्रेम भावना के साथ अपने पूरे परिवार के साथ मनाएं।
जय श्रीकृष्ण ........ जय श्रीकृष्ण.........जय श्रीकृष्ण........जय श्रीकृष्ण  

अजीत कुमार पाण्डेय,  राष्टीय अध्यक्ष- पूर्वांचल विकास मोर्चा

Friday, 14 August 2015

सभी देश वासियों को स्वतंत्रता दिवस की हार्दिक बधाई एवं शुभकामनायें

आजकल हम लोगों के लिए 15 अगस्त एक छुट्टी मात्र ही तो रह गया है। इस दिन हम स्वतंत्रता दिवस मनाते हैं और बाकी पूरे साले उस आज़ादी का दुरूपयोग करते हैं।

कहीं सुना था कि 68 साल में क्या बदला। कुछ ख़ास नहीं पहले अँगरेज़ यहां से पैसा लूट कर विदेश ले जाते थे और आज हम खुद अपना धन लूट कर विदेशों में जमा करते हैं। हमारे देश का कड़वा सत्य यही है कि यहां देशप्रेम सिर्फ किताबों और फिल्मों में ही दिखता है।

चाहे रिश्वत देना हो या लेना, सड़क पर चलना हो या थूकना, दो सेकंड में किसी की भी माता जी और बहन जी तक पहुँच जाना, दंगे कराना और उसके मज़े लेना, बलात्कारियों में धर्म ढून्ढ लेना ये है हमारा और आपका आज़ाद भारत।

ऑस्ट्रेलिया में 90 टन की ट्रेन को 50-60 लोग मिलकर झुका देते हैं ताकि एक आदमी की जिंदगी बच जाए और यहां हज़रत निजामुद्दीन पर एक आदमी 40 टन की ट्रेन के नीचे डेढ़ घंटे फंसे रहने के बाद मर जाता है।

अरे हमारा बस चले तो सड़क चलते आदमी के ऊपर ही गाडी चढ़ा दें। क्या ये वही सपनों का भारत है जो आज से 67 साल पहले देखा गया था? कब तक हम आर्यभट्ट के '0' को रोते रहेंगे।

कब तक अपनी संस्कृति की दुहाई देते रहेंगे। आज का भारत क्या सच में आज़ाद भारत है? इतने प्रयासों, मुश्किलों और बलिदानों के बाद मिली इस आज़ादी की क़द्र होनी चाहिए मुझे। मुझे सच में गर्व होना चाहिए हिन्दुस्तानी होने पर और हिन्दुस्तानियोंके बीच रहने पर।

मेरी और आपकी, हम सबकी कुछ छोटी-छोटी जिम्मेदारियाँ हैं इस देश के प्रति। एक बार जरा सोचियेगा जरूर क्योंकि सिर्फ नेता नहीं चलाते देश हम सब भी उसके सहभागी हैं!

जय हिन्द! जय भारत!
अजीत कुमार पाण्डेय
राष्टीय अध्यक्ष,  पूर्वांचल विकास मोर्चा
सभी देश वासियों को स्वतंत्रता दिवस की हार्दिक बधाई
 एवं शुभकामनायें
आजकल हम लोगों के लिए 15 अगस्त एक छुट्टी मात्र ही तो रह गया है। इस दिन हम स्वतंत्रता दिवस मनाते हैं और बाकी पूरे साले उस आज़ादी का दुरूपयोग करते हैं। कहीं सुना था कि 68 साल में क्या बदला। कुछ ख़ास नहीं पहले अँगरेज़ यहां से पैसा लूट कर विदेश ले जाते थे और आज हम खुद अपना धन लूट कर विदेशों में जमा करते हैं। हमारे देश का कड़वा सत्य यही है कि यहां देशप्रेम सिर्फ किताबों और फिल्मों में ही दिखता है। चाहे रिश्वत देना हो या लेना, सड़क पर चलना हो या थूकना, दो सेकंड में किसी की भी माता जी और बहन जी तक पहुँच जाना, दंगे कराना और उसके मज़े लेना, बलात्कारियों में धर्म ढून्ढ लेना ये है हमारा और आपका आज़ाद भारत। ऑस्ट्रेलिया में 90 टन की ट्रेन को 50-60 लोग मिलकर झुका देते हैं ताकि एक आदमी की जिंदगी बच जाए और यहां हज़रत निजामुद्दीन पर एक आदमी 40 टन की ट्रेन के नीचे डेढ़ घंटे फंसे रहने के बाद मर जाता है। अरे हमारा बस चले तो सड़क चलते आदमी के ऊपर ही गाडी चढ़ा दें। क्या ये वही सपनों का भारत है जो आज से 67 साल पहले देखा गया था? कब तक हम आर्यभट्ट के '0' को रोते रहेंगे। कब तक अपनी संस्कृति की दुहाई देते रहेंगे। आज का भारत क्या सच में आज़ाद भारत है? इतने प्रयासों, मुश्किलों और बलिदानों के बाद मिली इस आज़ादी की क़द्र होनी चाहिए मुझे। मुझे सच में गर्व होना चाहिए हिन्दुस्तानी होने पर और हिन्दुस्तानियोंके बीच रहने पर। मेरी और आपकी, हम सबकी कुछ छोटी-छोटी जिम्मेदारियाँ हैं इस देश के प्रति। एक बार जरा सोचियेगा जरूर क्योंकि सिर्फ नेता नहीं चलाते देश हम सब भी उसके सहभागी हैं!
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सभी देश वासियों को स्वतंत्रता दिवस की हार्दिक बधाई
 एवं शुभकामनायें
आजकल हम लोगों के लिए 15 अगस्त एक छुट्टी मात्र ही तो रह गया है। इस दिन हम स्वतंत्रता दिवस मनाते हैं और बाकी पूरे साले उस आज़ादी का दुरूपयोग करते हैं। कहीं सुना था कि 68 साल में क्या बदला। कुछ ख़ास नहीं पहले अँगरेज़ यहां से पैसा लूट कर विदेश ले जाते थे और आज हम खुद अपना धन लूट कर विदेशों में जमा करते हैं। हमारे देश का कड़वा सत्य यही है कि यहां देशप्रेम सिर्फ किताबों और फिल्मों में ही दिखता है। चाहे रिश्वत देना हो या लेना, सड़क पर चलना हो या थूकना, दो सेकंड में किसी की भी माता जी और बहन जी तक पहुँच जाना, दंगे कराना और उसके मज़े लेना, बलात्कारियों में धर्म ढून्ढ लेना ये है हमारा और आपका आज़ाद भारत। ऑस्ट्रेलिया में 90 टन की ट्रेन को 50-60 लोग मिलकर झुका देते हैं ताकि एक आदमी की जिंदगी बच जाए और यहां हज़रत निजामुद्दीन पर एक आदमी 40 टन की ट्रेन के नीचे डेढ़ घंटे फंसे रहने के बाद मर जाता है। अरे हमारा बस चले तो सड़क चलते आदमी के ऊपर ही गाडी चढ़ा दें। क्या ये वही सपनों का भारत है जो आज से 67 साल पहले देखा गया था? कब तक हम आर्यभट्ट के '0' को रोते रहेंगे। कब तक अपनी संस्कृति की दुहाई देते रहेंगे। आज का भारत क्या सच में आज़ाद भारत है? इतने प्रयासों, मुश्किलों और बलिदानों के बाद मिली इस आज़ादी की क़द्र होनी चाहिए मुझे। मुझे सच में गर्व होना चाहिए हिन्दुस्तानी होने पर और हिन्दुस्तानियोंके बीच रहने पर। मेरी और आपकी, हम सबकी कुछ छोटी-छोटी जिम्मेदारियाँ हैं इस देश के प्रति। एक बार जरा सोचियेगा जरूर क्योंकि सिर्फ नेता नहीं चलाते देश हम सब भी उसके सहभागी हैं!
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सभी देश वासियों को स्वतंत्रता दिवस की हार्दिक बधाई
 एवं शुभकामनायें
आजकल हम लोगों के लिए 15 अगस्त एक छुट्टी मात्र ही तो रह गया है। इस दिन हम स्वतंत्रता दिवस मनाते हैं और बाकी पूरे साले उस आज़ादी का दुरूपयोग करते हैं। कहीं सुना था कि 68 साल में क्या बदला। कुछ ख़ास नहीं पहले अँगरेज़ यहां से पैसा लूट कर विदेश ले जाते थे और आज हम खुद अपना धन लूट कर विदेशों में जमा करते हैं। हमारे देश का कड़वा सत्य यही है कि यहां देशप्रेम सिर्फ किताबों और फिल्मों में ही दिखता है। चाहे रिश्वत देना हो या लेना, सड़क पर चलना हो या थूकना, दो सेकंड में किसी की भी माता जी और बहन जी तक पहुँच जाना, दंगे कराना और उसके मज़े लेना, बलात्कारियों में धर्म ढून्ढ लेना ये है हमारा और आपका आज़ाद भारत। ऑस्ट्रेलिया में 90 टन की ट्रेन को 50-60 लोग मिलकर झुका देते हैं ताकि एक आदमी की जिंदगी बच जाए और यहां हज़रत निजामुद्दीन पर एक आदमी 40 टन की ट्रेन के नीचे डेढ़ घंटे फंसे रहने के बाद मर जाता है। अरे हमारा बस चले तो सड़क चलते आदमी के ऊपर ही गाडी चढ़ा दें। क्या ये वही सपनों का भारत है जो आज से 67 साल पहले देखा गया था? कब तक हम आर्यभट्ट के '0' को रोते रहेंगे। कब तक अपनी संस्कृति की दुहाई देते रहेंगे। आज का भारत क्या सच में आज़ाद भारत है? इतने प्रयासों, मुश्किलों और बलिदानों के बाद मिली इस आज़ादी की क़द्र होनी चाहिए मुझे। मुझे सच में गर्व होना चाहिए हिन्दुस्तानी होने पर और हिन्दुस्तानियोंके बीच रहने पर। मेरी और आपकी, हम सबकी कुछ छोटी-छोटी जिम्मेदारियाँ हैं इस देश के प्रति। एक बार जरा सोचियेगा जरूर क्योंकि सिर्फ नेता नहीं चलाते देश हम सब भी उसके सहभागी हैं!
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 एवं शुभकामनायें
आजकल हम लोगों के लिए 15 अगस्त एक छुट्टी मात्र ही तो रह गया है। इस दिन हम स्वतंत्रता दिवस मनाते हैं और बाकी पूरे साले उस आज़ादी का दुरूपयोग करते हैं। कहीं सुना था कि 68 साल में क्या बदला। कुछ ख़ास नहीं पहले अँगरेज़ यहां से पैसा लूट कर विदेश ले जाते थे और आज हम खुद अपना धन लूट कर विदेशों में जमा करते हैं। हमारे देश का कड़वा सत्य यही है कि यहां देशप्रेम सिर्फ किताबों और फिल्मों में ही दिखता है। चाहे रिश्वत देना हो या लेना, सड़क पर चलना हो या थूकना, दो सेकंड में किसी की भी माता जी और बहन जी तक पहुँच जाना, दंगे कराना और उसके मज़े लेना, बलात्कारियों में धर्म ढून्ढ लेना ये है हमारा और आपका आज़ाद भारत। ऑस्ट्रेलिया में 90 टन की ट्रेन को 50-60 लोग मिलकर झुका देते हैं ताकि एक आदमी की जिंदगी बच जाए और यहां हज़रत निजामुद्दीन पर एक आदमी 40 टन की ट्रेन के नीचे डेढ़ घंटे फंसे रहने के बाद मर जाता है। अरे हमारा बस चले तो सड़क चलते आदमी के ऊपर ही गाडी चढ़ा दें। क्या ये वही सपनों का भारत है जो आज से 67 साल पहले देखा गया था? कब तक हम आर्यभट्ट के '0' को रोते रहेंगे। कब तक अपनी संस्कृति की दुहाई देते रहेंगे। आज का भारत क्या सच में आज़ाद भारत है? इतने प्रयासों, मुश्किलों और बलिदानों के बाद मिली इस आज़ादी की क़द्र होनी चाहिए मुझे। मुझे सच में गर्व होना चाहिए हिन्दुस्तानी होने पर और हिन्दुस्तानियोंके बीच रहने पर। मेरी और आपकी, हम सबकी कुछ छोटी-छोटी जिम्मेदारियाँ हैं इस देश के प्रति। एक बार जरा सोचियेगा जरूर क्योंकि सिर्फ नेता नहीं चलाते देश हम सब भी उसके सहभागी हैं!
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 एवं शुभकामनायें
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 एवं शुभकामनायें
आजकल हम लोगों के लिए 15 अगस्त एक छुट्टी मात्र ही तो रह गया है। इस दिन हम स्वतंत्रता दिवस मनाते हैं और बाकी पूरे साले उस आज़ादी का दुरूपयोग करते हैं। कहीं सुना था कि 68 साल में क्या बदला। कुछ ख़ास नहीं पहले अँगरेज़ यहां से पैसा लूट कर विदेश ले जाते थे और आज हम खुद अपना धन लूट कर विदेशों में जमा करते हैं। हमारे देश का कड़वा सत्य यही है कि यहां देशप्रेम सिर्फ किताबों और फिल्मों में ही दिखता है। चाहे रिश्वत देना हो या लेना, सड़क पर चलना हो या थूकना, दो सेकंड में किसी की भी माता जी और बहन जी तक पहुँच जाना, दंगे कराना और उसके मज़े लेना, बलात्कारियों में धर्म ढून्ढ लेना ये है हमारा और आपका आज़ाद भारत। ऑस्ट्रेलिया में 90 टन की ट्रेन को 50-60 लोग मिलकर झुका देते हैं ताकि एक आदमी की जिंदगी बच जाए और यहां हज़रत निजामुद्दीन पर एक आदमी 40 टन की ट्रेन के नीचे डेढ़ घंटे फंसे रहने के बाद मर जाता है। अरे हमारा बस चले तो सड़क चलते आदमी के ऊपर ही गाडी चढ़ा दें। क्या ये वही सपनों का भारत है जो आज से 67 साल पहले देखा गया था? कब तक हम आर्यभट्ट के '0' को रोते रहेंगे। कब तक अपनी संस्कृति की दुहाई देते रहेंगे। आज का भारत क्या सच में आज़ाद भारत है? इतने प्रयासों, मुश्किलों और बलिदानों के बाद मिली इस आज़ादी की क़द्र होनी चाहिए मुझे। मुझे सच में गर्व होना चाहिए हिन्दुस्तानी होने पर और हिन्दुस्तानियोंके बीच रहने पर। मेरी और आपकी, हम सबकी कुछ छोटी-छोटी जिम्मेदारियाँ हैं इस देश के प्रति। एक बार जरा सोचियेगा जरूर क्योंकि सिर्फ नेता नहीं चलाते देश हम सब भी उसके सहभागी हैं!
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सभी देश वासियों को स्वतंत्रता दिवस की हार्दिक बधाई
 एवं शुभकामनायें
आजकल हम लोगों के लिए 15 अगस्त एक छुट्टी मात्र ही तो रह गया है। इस दिन हम स्वतंत्रता दिवस मनाते हैं और बाकी पूरे साले उस आज़ादी का दुरूपयोग करते हैं। कहीं सुना था कि 68 साल में क्या बदला। कुछ ख़ास नहीं पहले अँगरेज़ यहां से पैसा लूट कर विदेश ले जाते थे और आज हम खुद अपना धन लूट कर विदेशों में जमा करते हैं। हमारे देश का कड़वा सत्य यही है कि यहां देशप्रेम सिर्फ किताबों और फिल्मों में ही दिखता है। चाहे रिश्वत देना हो या लेना, सड़क पर चलना हो या थूकना, दो सेकंड में किसी की भी माता जी और बहन जी तक पहुँच जाना, दंगे कराना और उसके मज़े लेना, बलात्कारियों में धर्म ढून्ढ लेना ये है हमारा और आपका आज़ाद भारत। ऑस्ट्रेलिया में 90 टन की ट्रेन को 50-60 लोग मिलकर झुका देते हैं ताकि एक आदमी की जिंदगी बच जाए और यहां हज़रत निजामुद्दीन पर एक आदमी 40 टन की ट्रेन के नीचे डेढ़ घंटे फंसे रहने के बाद मर जाता है। अरे हमारा बस चले तो सड़क चलते आदमी के ऊपर ही गाडी चढ़ा दें। क्या ये वही सपनों का भारत है जो आज से 67 साल पहले देखा गया था? कब तक हम आर्यभट्ट के '0' को रोते रहेंगे। कब तक अपनी संस्कृति की दुहाई देते रहेंगे। आज का भारत क्या सच में आज़ाद भारत है? इतने प्रयासों, मुश्किलों और बलिदानों के बाद मिली इस आज़ादी की क़द्र होनी चाहिए मुझे। मुझे सच में गर्व होना चाहिए हिन्दुस्तानी होने पर और हिन्दुस्तानियोंके बीच रहने पर। मेरी और आपकी, हम सबकी कुछ छोटी-छोटी जिम्मेदारियाँ हैं इस देश के प्रति। एक बार जरा सोचियेगा जरूर क्योंकि सिर्फ नेता नहीं चलाते देश हम सब भी उसके सहभागी हैं!
जय हिन्द! जय भारत!
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Friday, 7 August 2015

क्या सुषमा स्वराज के बयान से निकलेगी कोई राह?

सुषमा स्वराज ने ‘ललितगेट’ कांड में अपनी सफाई पेश करते हुए लोकसभा में भावपूर्ण वक्तव्य दिया। वे तर्क दोहराए, जो इस मामले में वे अपने बचाव में पेश करती रही हैं। सारांश यह कि उनकी मंशा ललित मोदी की नहीं, बल्कि उनकी कैंसर पीड़ित पत्नी की मदद करने की थी। फिर भी उन्होंने ब्रिटिश अधिकारियों से मोदी को यात्रा दस्तावेज देने की पैरवी नहीं की, बल्कि महज यह कहा कि अगर उन्होंने ऐसा किया तो उससे भारत से ब्रिटेन के रिश्तों पर कोई फर्क नहीं पड़ेगा। 


 दुख जताया कि उनके विपक्षी ‘दोस्त’ उनका पक्ष सुनने तक को तैयार नहीं हैं और उनसे पूछा कि उन्होंने क्या गलत किया है। इसके बाद रामचरितमानस का हवाला देते हुए दार्शनिक अंदाज में कहा कि हानि-लाभ, जीवन-मरण, यश-अपयश आदि मनुष्य नहीं बल्कि विधि यानी ईश्वर के हाथ में हैं। मगर उनके लिए अफसोस यह रहा कि इन बातों को सुनने के लिए अधिकतर विपक्षी सदस्य सदन में नहीं थे। 

कांग्रेस और कई अन्य विपक्षी दल पहले ही अपना फैसला सुना चुके हैं कि विदेश मंत्री का आचरण नैतिक रूप से गलत था, क्योंकि उनके पति एवं बेटी के पेशेवर हित ललित मोदी से जुड़े थे। कांग्रेस तो यह दावा करने तक गई है कि स्वराज ने भ्रष्टाचार निरोधक कानून के तहत ‘अपराध’ किया। 

अतः विपक्ष स्वराज की कोई बात सुनने से पहले उनका इस्तीफा चाहता है। जबकि भाजपा की तरफ से कहा जा चुका है कि वह ‘यूपीए नहीं है’, अतः कोई इस्तीफा नहीं होगा। यानी दोनों पक्ष अपने रुख के चरम बिंदु पर हैं। इस पर कायम रहते मेल-मिलाप की कोई सूरत नहीं निकल सकती। इस रुख में बदलाव की गुंजाइश इसलिए नहीं बन रही है, क्योंकि मसले को गुण-दोष के आधार पर देखने की बजाय सियासी स्वार्थ से प्रेरित होने की प्रवृत्ति राजनीतिक समुदाय पर अधिक हावी है। 

दुर्भाग्यपूर्ण है कि दोनों पक्षों ने प्रत्यक्ष आपसी संवाद तोड़ रखा है। यह लोकतंत्र की मूल भावना के विरुद्ध है। इसके बावजूद यह रेखांकित करने का पहलू है कि स्वराज का स्वर टकराव भरा नहीं था। इसे सकारात्मक नज़रिया माना जाएगा। दोनों पक्ष ऐसा दृष्टिकोण अपनाएं तो अटूट लगते वर्तमान गतिरोध के बीच भी राह निकल सकती है। 

क्या यह संभव नहीं है कि प्रधानमंत्री विपक्षी नेताओं की बैठक बुलाएं, जिसमें दोस्ताना माहौल में खुल कर बात हो? फिलहाल देश समाधान की आस में है, ताकि राष्ट्र हित से जुड़े विधायी कार्य पूरे हो सकें।

Tuesday, 21 July 2015

मोदी का मौन

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपनी हाजिर जवाबी के लिए जाने जाते हैं, लेकिन आज जब वे मॉनसून सत्र की कार्यवाही में शरीक होने के लिए संसद भवन पहुंचे तो पत्रकारों के सवालों को अनसुना कर अपनी चुप्पी जारी रखी. पत्रकारों ने मोदी से एक के बाद एक कई सवाल किए, लेकिन मोदी हल्की मुस्कुराहट के साथ पत्रकारों के सवालों को अनसुना करते रहे.

एक पत्रकार ने मोदी से पूछा कि करप्शन के सवाल पर आपका क्या कहना है? मोदी ने इस सवाल को जैसे ही अनसुना किया, दूसरा सवाल दाग़ दिया गया. दूसरा सवाल था कि क्या आपको सत्र के सुचारू रुप से चलने की उम्मीद है? मोदी इस सवाल पर भी खामोश रहे. वे सवाल सुनते रहे, और अपनी गर्दन इधर से उधर हिलाते रहे. इसी बीच तीसरा सवाल किया गया कि कांग्रेस ने स्थगन प्रस्ताव के लिए नोटिस दिया है. क्या सरकार बहस के लिए तैयार है? मोदी ने इस सवाल पर अपनी खामोशी जारी रखी. पत्रकार सवाल किए जा रहे थे और उनके पीछे खड़े मंत्रीगण मुस्कुरा रहे थे. लेकिन पत्रकार भी अपने सवाल जारी रखे हुए थे. अगला सवाल किया गया कि जमीन बिल पर आपका क्या कहना है?

इन सवालों को अनसुना करके मोदी मुड़े और चल दिए. अब सवाल किया जा रहा है कि आखिर मोदी अपनी चुप्पी कब तोड़ेंगे?