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Tuesday, 24 December 2013

युगपुरुष अटल जी को जन्मदिन कि हार्दिक शुभकामनाये - पूर्वांचल विकास मोर्चा



आज पूर्व प्रधानमंत्री श्री अटल बिहारी के जन्मदिन पर उनको पूर्वांचल विकास मोर्चा कि तरफ से हार्दिक  बधाई।  २५ दिसम्बर १९२५ को एक साधारण परिवार मैं जन्मे अटल जी भारत के १० वे प्रधानमंत्री बने।  इसके अलावा भी वे विभिन्न सरकारों में कई महत्वपूर्ण पदों पर रह चुके हैं। अटल जी एक प्रखर वक्ता होने के साथ अपनी ख़ास शैली कि कविताओं के लिए भी जाने जाते हैं।  भारत के प्रधानमन्त्री रहते हुए उन्होंने भारत को विश्व के मानचित्र  पर एक विशेष स्थान दिलाया।  भारत के इस महानसपूत को जन्मदिन पर विशेष बधाई तथा अच्छे स्वास्थ्य कि कामना। अजित कुमार पाण्डेय ( अध्यक्ष ) पूर्वांचल विकास मोर्चा 

Monday, 23 December 2013

हिंदुस्तानी राजनीति के आखिरी करिश्माई राजनेता हैं अटल बिहारी वाजपेयी

अटल बिहारी वाजपेयी यानि एक ऐसा नाम जिसने भारतीय राजनीति को अपने व्यक्तित्व और कृतित्व से इस तरह प्रभावित किया जिसकी मिसाल नहीं मिलती। एक साधारण परिवार में जन्में इस राजनेता ने अपनी भाषण कला, भुवनमोहिनी मुस्कान, लेखन और विचारधारा के प्रति सातत्य का जो परिचय दिया वह आज की राजनीति में दुर्लभ है। सही मायने में वे पं.जवाहरलाल नेहरू के बाद भारत के सबसे करिश्माई नेता और प्रधानमंत्री साबित हुए।

एक बड़े परिवार का उत्तराधिकार पाकर कुर्सियां हासिल करना बहुत सरल है किंतु वाजपेयी की पृष्ठभूमि और उनका संघर्ष देखकर लगता है कि संकल्प और विचारधारा कैसे एक सामान्य परिवार से आए बालक में परिवर्तन का बीजारोपण करती है। शायद इसीलिए राजनैतिक विरासत न होने के बावजूद उनके पीछे एक ऐसा परिवार था जिसका नाम संघ परिवार है।

जहां अटलजी राष्ट्रवाद की ऊर्जा से भरे एक ऐसे महापरिवार के नायक बने, जिसने उनमें इस देश का नायक बनने की क्षमताएं न सिर्फ महसूस की वरन अपने उस सपने को सच किया, जिसमें देश का नेतृत्व करने की भावना थी। अटलजी के रूप में इस परिवार ने देश को एक ऐसा नायक दिया जो वास्तव में हिंदू संस्कृति का प्रणेता और पोषक बना।
.अटलबिहारी बाजपेयी सही मायने में एक ऐसे प्रधानमंत्री थे जो भारत को समझते थे।भारतीयता को समझते थे। राजनीति में उनकी खींची लकीर इतनी लंबी है जिसे पार कर पाना संभव नहीं दिखता। अटलजी सही मायने में एक ऐसी विरासत के उत्तराधिकारी हैं जिसने राष्ट्रवाद को सर्वोपरि माना। देश को सबसे बड़ा माना। देश के बारे में सोचा और अपना सर्वस्व देश के लिए अर्पित किया।


 उनकी समूची राजनीति राष्ट्रवाद के संकल्पों को समर्पित रही। वे भारत के प्रधानमंत्री बनने से पहले विदेश मंत्री भी रहे। उनकी यात्रा सही मायने में एक ऐसे नायक की यात्रा है जिसने विश्वमंच पर भारत और उसकी संस्कृति को स्थापित करने का प्रयास किया।

मूलतः पत्रकार और संवेदनशील कवि रहे अटल जी के मन में पूरी विश्वमानवता के लिए एक संवेदना है। यही भारतीय तत्व है। इसके चलते ही उनके विदेश मंत्री रहते पड़ोसी देशों से रिश्तों को सुधारने के प्रयास हुए तो प्रधानमंत्री रहते भी उन्होंने इसके लिए प्रयास जारी रखे। भले ही कारगिल का धोखा मिला, पर उनका मन इन सबके विपरीत एक प्रांजलता से भरा रहा। बदले की भावना न तो उनके जीवन में है न राजनीति में। इसी के चलते वे अजातशत्रु कहे जाते हैं।

पने समूचे जीवन से अटलजी जो पाठ पढ़ाते हैं उसमें राजनीति कम और राष्ट्रीय चेतना ज्यादा है। सारा जीवन एक तपस्वी की तरह जीते हुए भी वे राजधर्म को निभाते हैं। सत्ता साकेत में रहकर भी वीतराग उनका सौंदर्य है। वे एक लंबी लकीर खींच गए हैं, इसे उनके चाहनेवालों को न सिर्फ बड़ा करना है बल्कि उसे दिल में भी उतारना होगा। उनके सपनों का भारत तभी बनेगा और सामान्य जनों की जिंदगी में उजाला फैलेगा।

 स्वतंत्र भारत के इस आखिरी करिश्माई नेता का व्यक्तित्व और कृतित्व सदियों तक याद किया जाएगा, वे धन्य हैं जिन्होंने अटल जी को देखा, सुना और उनके साथ काम किया है। ये यादें और उनके काम ही प्रेरणा बनें तो भारत को परमवैभव तक पहुंचने से रोका नहीं जा सकता। शायद इसीलिए उनको चाहनेवाले उनकी लंबी आयु की दुआ करते हैं और यह पंक्तियां गाते हुए आगे बढ़ते हैं ‘चल रहे हैं चरण अगणित, ध्येय के पथ पर निरंतर’।

Friday, 13 December 2013

शरद पवार ने पूर्वांचलियों के साथ किया धोखा - अजित पाण्डेय ( अध्यक्ष - पूर्वांचल विकास मोर्चा )



आज में यह ब्लॉग मुख्य रूप से पूर्वांचलवासियों से जुडी समस्याओं और और उनकी अनदेखी के ऊपर लिख रहा हूँ।  आजादी के बाद से ही लगातार इस क्षेत्र कि अनदेखी कांग्रेस द्वारा कि जाती रही है।  परिणाम स्वरुप यह क्षेत्र पिछड़ता चला गया।  जिस प्रकार सरकार ने अन्य क्षेत्रों में विकास किया और  इंफ्रास्ट्रक्चर का विकास किया और शिक्षा, कृषि, भूमि विकास, स्वास्थय आदि अन्य क्षेत्रों में काम किया जिसके परिणाम स्वरुप यह क्षेत्र तो विकसित हो गए लेकिन लगातार अनदेखी कि वजह से पूर्वांचल कि हालत बद से बदतर हो गयी है। लगातार अनदेखी का आलम ये है कि इस क्षेत्र में विकास का कोई नामोनिशान तक नहीं मिलता तथा रोज़गार, कृषि , शिक्षा जैसे बुनियादी क्षेत्रों कि हालत पतली है।  इसकी  वजह से तमाम युवक रोज़गार कि तलाश में अन्य प्रदेशों में पलायन को मजबूर हैं।
इसकी वजह से कुछ ख़ास शहरों में आबादी भी बढ़ती जा रही है और लोग कीड़े मकोड़ो कि तरह झुग्गियों मैं रहनो को मजबूर हैं।  आखिर इतना बड़ा क्षेत्र  होने के बावजूद और तमाम राष्ट्रीय स्तर के  नेता देने के बावजूद भी पूर्वांचल का विकास क्यों नहीं हो पाया ? इसका एक कारण यहाँ का जातीय समीकरण भी है।  कांग्रेस ने आज़दी के बाद से ही लगातार इस में जातीय आधार पर लोगो को बाटने कि साजिश रची जिसमें उसे बसपा , सपा , जदयू का भी खूब साथ मिला।  इन सभी अपने अपने फायदे के लिए इस क्षेत्र का खूब बटवारा किया और यहाँ के लोगो शोषण किया।  गौर फरमाने वाली बात यह है कि आखिर इस क्षेत्र मुलभुत सुविधावों कि कमी इस लिए कि गयी ताकि पूर्वांचली अन्य लोगो से कटे रहे हैं और विकास कि लहर के कारन उनमे एकजुटता न जाये जिसके परिणाम स्वरुप वे  इन लोगो कि गन्दी चालों को समझ जाएँ और इनका वोट बैंक न ख़त्म हो जाये।  इसका उदहारण हमे अन्य पिछड़े क्षेत्रों के अध्ययन से मिल सकता है , जैसे कि पूर्वोत्तर राज्य और जम्मू और कश्मीर। इन सभी जगहों पर कांग्रेस ने स्थानीय दलों के साथ मिल कर जातीय विभाजन किया और धार्मिक उन्नमाद को बढ़ावा दिया।  अभी हाल ही मैं शरद पवार द्वारा पूर्वांचल के लोगो और किसानो के साथ किया गया भेदभाव भी इसी कि कड़ी है। पूर्वांचल के विकास के लिए जरुरी है कि इन्हे एकजुट किया जाये और एक शशक्त आवाज दी जाये और यह काम सिर्फ भारतीय जनता पार्टी के द्वारा ही सम्भव है क्योंकि मुख्य राष्ट्रीय पार्टी होने और अगले लोक सभा चुनावों मैं पक्की जीत जीत मिलने के कारण  पूर्वांचलियों को एकजुट होना होगा उर भारतीय जनता पार्टी को जितना होगा, ताकि इस क्षेत्र का विकास सम्भव होसके।

अजित कुमार पाण्डेय
अध्यक्ष , पूर्वांचल विकास मोर्चा 

Monday, 9 December 2013



यूपीए अध्यक्ष श्रीमती सोनिया गांधी जी को जन्मदिवस कि हार्दिक शुभकामनाये। में उनके स्वास्थ्य और लम्बी आयु कि कामना करता हूँ।    ( अध्यक्ष ) पूर्वांचल विकास मोर्चा 

Sunday, 8 December 2013

भाजपा का वनवास ख़त्म दिल्ली मैं बनेगी सरकार




आखिरकार भाजपा का १५ वर्षों का वनवास ख़त्म हुआ और अब वह दिल्ली मैं भी सरकार बनाने जा रही है।  चारो राज्यों मैं सफलता से बीजेपी काफी उत्साहित है और लोकसभा चुनाओ में भी पूर्ण बहुमत बनाने का दावा कर रही है।  दिल्ली और राजस्थान मैं कोग्रेस का सूपड़ा साफ़ हो गया है और उसे भारी नुक्सान उठाना पड़ा है , खास तौर पर दिल्ली में तो वह मुख्या विपक्षी दल भी नहीं बन पायी है।  उससे ये हक़ भी आम आदमी पार्टी ने छीन लिया है जिससे कोंग्रेसियों में भारी निराशा छायी हुई है।  अपनी करारी हार से झुँझलाई शीला दीक्षित ने तो वोटरों को कि बेवकूफ बता दिया। वो यह भूल गयीं कि इन्ही वोटरो ने उन्हें १५ वर्षों तक सरकार में बनाये रखा था।  लेकिन अपनी कमजोर नीतियों के कारन उन्हें मुह कि कहानी पड़ी. 

रमन सिंह की छत्तीसगढ़ में हॅट्रिक



छत्तीसगढ़ के विधानसभा के चुनावों में रमन सिंह के नेतृत्व में भाजपा का लगातार तीसरी बार सरकार बनाना इस बात का संकेत है कि भाजपा को लोकसभा के चुनावों मैं भरी बहुमत मिलेगा।  इससे यह बात भी स्पष्ट हो जाती है कि जनता ने कांग्रेस को पूरी तरह नकार दिया है।  चारो विधान सभा चुनावों में मिले बहुमत के लिए भाजपा बधाई के पात्र हैं।  

पूर्वांचलियों की अनदेखी दिल्ली में बीजेपी को पड़ी भारी ---- अध्यक्ष पूर्वांचल विकास मोर्चा

दिल्ली विधान सभा चुनावो में अब तक आये नतीजो से साफ़ हो गया है कि किसी भी पार्टी को पूर्ण बहुमत नहीं मिलेगा जिससे किसी भी पार्टी कि सर्कार बनते आसार नहीं नज़र आ रहे।  हलाकि बीजेपी सबसे बड़ी पार्टी के रूप मैं उभर कर आयी है लेकिन उसके पास भी पूर्ण बहुमत नहीं है  जिसका   मुख्य कारण भारतीय जनता पार्टी द्वारा दिल्ली में पूर्वांचलियों कि अनदेखी रही।  पूर्वी दिल्ली में जहा सबसे ज्यादा करीब ४०% पूर्वांचल वासी रहते है वहाँ बीजेपी कुछ खास नहीं कर पायी और गांधीनगर और लक्ष्मी नगर जैसी सीटे उनके हाथ से निकल गयी।  ज्यादातर सीटों पर बीजेपी को हार मिली।  बीजेपी दिल्ली के क्षेत्रीय समीकरण को समझने में नाकाम रही, जिसका फायदा आम आदमी पार्टी ने भरपूर उठाया।  हलाकि फिर भी बीजेपी सबसे ज्यादा सीटे जीतने में कामयाब रही फिर भी सरकार बनाने के लिए उन्हें काफी मेहनत करनी पड़ेगी।  दिल्ली मोदी का जादू चल गया और भारतीय जनता पार्टी सबसे ज्यादा सीटे जीतने मैं कामयाब हुई।  लेकिन फिर भी सरकार बनाने के लिए उन्हें और सीटो कि जरुरत है।  हालात चाहे जो भी हो लेकिन पूर्वांचलियों कि अनदेखी बीजेपी को बहुत भारी पड़ी है , जिसका खामियाजा उन्हें भुगतना पद सकता है।