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Monday, 9 December 2013
Sunday, 8 December 2013
भाजपा का वनवास ख़त्म दिल्ली मैं बनेगी सरकार
आखिरकार भाजपा का १५ वर्षों का वनवास ख़त्म हुआ और अब वह दिल्ली मैं भी सरकार बनाने जा रही है। चारो राज्यों मैं सफलता से बीजेपी काफी उत्साहित है और लोकसभा चुनाओ में भी पूर्ण बहुमत बनाने का दावा कर रही है। दिल्ली और राजस्थान मैं कोग्रेस का सूपड़ा साफ़ हो गया है और उसे भारी नुक्सान उठाना पड़ा है , खास तौर पर दिल्ली में तो वह मुख्या विपक्षी दल भी नहीं बन पायी है। उससे ये हक़ भी आम आदमी पार्टी ने छीन लिया है जिससे कोंग्रेसियों में भारी निराशा छायी हुई है। अपनी करारी हार से झुँझलाई शीला दीक्षित ने तो वोटरों को कि बेवकूफ बता दिया। वो यह भूल गयीं कि इन्ही वोटरो ने उन्हें १५ वर्षों तक सरकार में बनाये रखा था। लेकिन अपनी कमजोर नीतियों के कारन उन्हें मुह कि कहानी पड़ी.
रमन सिंह की छत्तीसगढ़ में हॅट्रिक
छत्तीसगढ़ के विधानसभा के चुनावों में रमन सिंह के नेतृत्व में भाजपा का लगातार तीसरी बार सरकार बनाना इस बात का संकेत है कि भाजपा को लोकसभा के चुनावों मैं भरी बहुमत मिलेगा। इससे यह बात भी स्पष्ट हो जाती है कि जनता ने कांग्रेस को पूरी तरह नकार दिया है। चारो विधान सभा चुनावों में मिले बहुमत के लिए भाजपा बधाई के पात्र हैं।
पूर्वांचलियों की अनदेखी दिल्ली में बीजेपी को पड़ी भारी ---- अध्यक्ष पूर्वांचल विकास मोर्चा
दिल्ली विधान सभा चुनावो में अब तक आये नतीजो से साफ़ हो गया है कि किसी भी पार्टी को पूर्ण बहुमत नहीं मिलेगा जिससे किसी भी पार्टी कि सर्कार बनते आसार नहीं नज़र आ रहे। हलाकि बीजेपी सबसे बड़ी पार्टी के रूप मैं उभर कर आयी है लेकिन उसके पास भी पूर्ण बहुमत नहीं है जिसका मुख्य कारण भारतीय जनता पार्टी द्वारा दिल्ली में पूर्वांचलियों कि अनदेखी रही। पूर्वी दिल्ली में जहा सबसे ज्यादा करीब ४०% पूर्वांचल वासी रहते है वहाँ बीजेपी कुछ खास नहीं कर पायी और गांधीनगर और लक्ष्मी नगर जैसी सीटे उनके हाथ से निकल गयी। ज्यादातर सीटों पर बीजेपी को हार मिली। बीजेपी दिल्ली के क्षेत्रीय समीकरण को समझने में नाकाम रही, जिसका फायदा आम आदमी पार्टी ने भरपूर उठाया। हलाकि फिर भी बीजेपी सबसे ज्यादा सीटे जीतने में कामयाब रही फिर भी सरकार बनाने के लिए उन्हें काफी मेहनत करनी पड़ेगी। दिल्ली मोदी का जादू चल गया और भारतीय जनता पार्टी सबसे ज्यादा सीटे जीतने मैं कामयाब हुई। लेकिन फिर भी सरकार बनाने के लिए उन्हें और सीटो कि जरुरत है। हालात चाहे जो भी हो लेकिन पूर्वांचलियों कि अनदेखी बीजेपी को बहुत भारी पड़ी है , जिसका खामियाजा उन्हें भुगतना पद सकता है।
शिवराज सिंह चौहान और वसुंधरा राजे ने मरी बाजी
राजस्थान मैं गहलोत सरकार राज्य का विकास करने मैं पूरी तरह विफल रही और वसुंधरा राजे ने जिस तरह से एक सछम विपछ कि भूमिका निभायी और स्थानीय मुद्दे उठाये उससे जनता का उनमें विश्वास जगा और उसका परिणाम उन्हें चुनावो मैं भरी के रूप मैं मिला।
मध्य प्रदेश में भी शिवराज सिंह जी भी हैट्रिक लगाने वाले हैं और उनके नेतृत्व में जिस तरह पार्टी ने राज्य का चौतरफा विकास किया उससे साफ़ है जनता अब कांग्रेस और राहुल गांधी के खोखले वादो मैं आने वाली नहीं है।
इन चुनावो ने ये भी साफ़ कर दिया कि जिस तरह से राहुल गांधी और और नरेंद्र मोदी कि कि तुलना कि जा रही थी उसका अब कोई मतलब नहीं है। मोदी कि लहर का ही परिणाम है कि कांग्रेस का सूपड़ा ही साफ़ हो गया है। अब आने वाले लोक सभा के चुनावो में भी भारतीय जनता पार्टी यही जीत हासिल करती है तो निश्चित रूप से इसका श्रेय मोदी को ही जायेगा।
Friday, 6 December 2013
मनमोहन और सोनिया को पूर्वांचलियों को धोखा देना पड़ा भारी ----- "अध्यक्ष "पूर्वांचल विकास मोर्चा
चारो राज्यों के शुरुआती रुझानों मे भारतीय जनता पार्टी कि पक्की होती जीत को देख कर मनमोहन सिंह और सोनिया गांधी के पसीने छूट गए है। आलम ये हैं कि कांग्रेस का कोई बड़ा नेता टेलीविज़न पर आने से कतरा रहा है। ज्ञातव्य हो कि यही कांग्रेस के बड़े बड़े नेता कल तक न्यूज़ चैनलों पर अपनी जीत के फटे ढोल पीट रहे थे। लेकिन मतादन के बाद के बदले हालत के बाद जैसे उनकी जुबान ही सील गयी हो। अब जब कि भारतीय जनता पार्टी कि चारो राज्यों में सरकार बनना तय है तो महमोहन जी को और सोनिया जी को नैतिक आधार पर हार स्वीकार कर लेनी चाहिए।
डा. हर्षवर्धन के नेतृत्व में भाजपा की सरकार बनाने का मन बना चुकी
दिल्ली में हुए विधान सभा चुनाव में भाजपा रिकार्ड मतों से जीतकर सरकार बनाएगी। दिल्ली विधान सभा चुनाव में कांग्रेस की लोक विरोधी लहर देखने को मिली है। चुनाव के सर्वे भी भाजपा के पक्ष में हुए हैं। दिल्ली की जनता कांग्रेस के कुशासन से दुखी होकर डा. हर्षवर्धन के नेतृत्व में भाजपा की सरकार बनाने का मन बना चुकी है।
इधर चुनाव खत्म हुए, उधर विभिन्न ओपीनियन पोल्स ने भाजपा को दिल्ली में पूर्ण बहुमत प्राप्त करते हुए दिखाया। ओपीनियन पोल्स से उत्साहित होकर भाजपा कार्यकर्ताओं ने सोशल नेटवर्किंग साईट्स पर एक-दूसरे को बधाई देने शुरू भी कर दी।
उत्साहित हो कर भाजपा के मुख्यमंत्री पद के दावेदार हर्षवर्धन ने भी फेसबुक और ट्विटर से भाजपा कार्यकर्ताओं का धन्यवाद किया। चुनाव के नतीजे आने में अभी दो दिन का समय है, लेकिन ओपीनियन पोल पर भरोसा कर भाजपा ने अपनी जीत पक्की समझ ली है। कार्यकर्ताओं ने जश्न मनाना शुरू कर दिया है। ट्विटर पर भाजपा की जीत टॉप ट्रैंडिग टापिक्स में रही। जिस पर दिन भर लोगों ने ट्विट्स कर एक-दूसरे को जीत की बधाई दी। फेसबुक पर हर्षवर्धन के आफिशयल पेज पर उन्होंने आम जनता और भाजपा कार्याकर्ताओं को धन्यवाद दिया। वोटिंग के बाद से ही भाजपा कार्यकर्ताओं में जबर्दस्त उत्साह देखने को मिल रहा है, वहीं दूसरी ओर कांग्रेस कार्यालय और कार्यकर्ताओं में मायूसी छाई है।
पांच राज्यों में विधानसभा चुनाव के बाद तमाम चैनलों में दिखाए गए एक्जिट पोल के मुताबिक, दिल्ली, राजस्थान, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में भाजपा को बढ़त मिलने का अनुमान जताया गया है। साथ ही दिल्ली में पहली बार चुनाव में उतरी 'आप' पार्टी का भी प्रदर्शन काफी अच्छा बताया जा रहा है। इन राज्यों में भाजपा और कांग्रेस के बीच 4-0 की बाजी भाजपा के पक्ष में बताई जा रही है। दिल्ली में बुधवार को हुए विधानसभा चुनाव में मतदाताओं ने रिकॉर्ड तोड़ 67 फीसदी मतदान किया। दिल्ली में इससे पहले कभी इतनी बड़ी संख्या में वोट नहीं डाले गए। इससे पहले सबसे ज्यादा वोटिंग का रिकॉर्ड 1993 का था और उस वक्त दिल्ली में 61 फीसदी वोट पड़े थे। दिल्ली में मतदान के दौरान वोटरों में ऐसा उत्साह देखने को मिला कि शाम 5 बजे के बाद भी करीब पौन दो लाख लोगों ने वोट डाला।
राज्यवार स्थिति इस प्रकार है -
राजस्थान : एक्जिट पोल बता रहा है कि राजस्थान में वोटरों ने कांग्रेस को सत्ता से बेदखल करने के लिए अपने मत का इस्तेमाल किया है। किसी दल को सत्ता में आने के लिए 100 से ज्यादा सीटों की दरकार होगी और ऐसे में भाजपा को 138 और कांग्रेस के हाथ में मात्र 44 सीटें जाने की संभावना जताई जा रही है।
मध्य प्रदेश : यहां पर माना जा रहा है कि भाजपा के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान तीसरी बार सत्ता में आ रहे हैं। यहां पर सरकार बनाने के लिए 115 सीटों पर जीत जरूरी है और एक्जिट पोल के मुताबिक भाजपा को 144 सीटें और कांग्रेस के हाथ 77 सीटें लग रही हैं।
दिल्ली : दिल्ली की गद्दी पर काबिज होने के लिए किसी दल को 35 सीटें चाहिए और यहां पर भाजपा को 34 सीटें मिलती दिखाई जा रही हैं। वहीं, कांग्रेस को 20 और आम आदमी पार्टी को 13 सीटें हासिल होने की संभावना जताई गई है।
छत्तीसगढ़ : इस राज्य में भी रमन सिंह के नेतृत्व में भाजपा को फिर सत्ता मिल सकती है। सत्ता में काबिज होने के लिए 45 सीटों की जरूरत होगी और एक्जिट पोल के मुताबिक, भाजपा को 50 और कांग्रेस को 37 सीटें मिल सकती हैं।
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